ज्योतिष आचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्रा
दिनांक: 30 दिसम्बर 2025
दिन: मंगलवार
विक्रम संवत: 2082
शक संवत: 1947
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: शिशिर
मास: पौष
पक्ष: शुक्ल
तिथि: एकादशी रात्रि 1:13 बजे तक, तत्पश्चात द्वादशी
नक्षत्र: भरणी रात्रि 12:51 बजे तक, तत्पश्चात कृत्तिका
योग: सिद्ध रात्रि 10:31 बजे तक, तत्पश्चात साध्य
राहुकाल: सायं 3:00 बजे से 4:30 बजे तक
सूर्योदय: प्रातः 6:47 बजे
सूर्यास्त: सायं 5:13 बजे
दिशाशूल: उत्तर दिशा
व्रत-पर्व विवरण
पुत्रदा एकादशी
विशेष महत्व:
पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से गुणवान, संस्कारी एवं दीर्घायु पुत्र की प्राप्ति होती है।
पुत्रदा एकादशी व्रत विशेष
आज दिनांक 30 दिसम्बर 2025, मंगलवार को रात्रि 1:13 बजे तक एकादशी तिथि है। आज पूरा दिन तथा अर्धरात्रि तक एकादशी का प्रभाव रहेगा।
पारण समय:
31 दिसम्बर 2025, बुधवार को प्रातः 8:00 बजे से 11:00 बजे के मध्य करें।
विशेष:
आज की पुत्रदा एकादशी गृहस्थ एवं संन्यासी दोनों के लिए मान्य है।
भक्ति-वृद्धि हेतु विशेष
जो साधक अपनी भक्ति को बढ़ाना चाहते हैं, वे आज भगवद्गीता के 12वें अध्याय (भक्तियोग अध्याय) का पाठ करें। पाठ के पश्चात भगवद्गीता को हाथ में लेकर भगवान से हृदयपूर्वक प्रार्थना करें— “हे प्रभु! भगवद्गीता का बारहवाँ अध्याय भक्तियोग का अध्याय है। आज मैंने इसका पाठ किया है। कृपा कर मेरी भक्ति को निरंतर बढ़ाइए। मेरी भक्ति ही मेरा सर्वस्व बने।” शास्त्रों में कहा गया है कि सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं जाती। भक्तियोग का अभ्यास करने से भगवान और गुरु की कृपा अवश्य प्राप्त होती है, और वही भक्ति समस्त सुखों का मूल स्रोत है।























