बरगद वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व
लखनऊ, संवाददाता : ज्येष्ठ अमावस्या पर शनिवार को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। वट वृक्ष की पूजा के कारण इसे बरगदाही भी कहा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार अमावस्या 16 मई को सुबह 5:11 बजे से 17 मई को रात 1:30 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 16 मई को वट पूजन करना श्रेष्ठ माना गया है। इस बार व्रत पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं। सुबह चंद्रमा मेष राशि में मंगल के साथ युति करेंगे, जबकि रात 10:46 बजे वृषभ राशि में प्रवेश कर सूर्य के साथ युति बनाएंगे। इसके साथ सौभाग्य योग के बाद शोभन योग बनेगा। मिथुन राशि में गुरु और शुक्र की युति भी विशेष शुभ मानी जा रही है।
पूजा विधि
सुहागिन महिलाएं सुबह स्नान कर नए वस्त्र और सोलह श्रृंगार धारण करती हैं। इसके बाद वट वृक्ष के नीचे माता सावित्री की पूजा की जाती है। जड़ में दूध, हल्दी, कुमकुम, नारियल, भीगे चने, फल और फूल अर्पित किए जाते हैं। धूप-दीप जलाकर पति की दीर्घायु की कामना की जाती है। अंत में वट वृक्ष की सात परिक्रमा कर कच्चा धागा या मोली बांधी जाती है और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी जाती है।
शनि जयंती भी आज
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती भी मनाई जाती है। इस अवसर पर शनि पूजन, व्रत, दान और मंत्र जाप का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन पितरों के नाम तर्पण करने से शांति मिलती है।
शनि पूजा के उपाय
शनि को प्रसन्न करने के लिए पीपल के वृक्ष की पूजा, सरसों के तेल का दीपक जलाना, जरूरतमंदों की सेवा और काले तिल, काली उड़द, लोहे के बर्तन, काला वस्त्र आदि का दान शुभ माना गया है।
























