उपभोक्ताओं को राहत दिलाने की तैयारी में परिषद, 35 लाख गरीब परिवारों के लिए उठाई बड़ी मांग
लखनऊ, संवाददाता : उत्तर प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों की नई बिजली दरों को अंतिम रूप देने के लिए प्रस्तावित राज्य सलाहकार समिति की बैठक अब 18 मई के बजाय 20 मई को आयोजित की जाएगी। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बैठक की तिथि में बदलाव करते हुए नई तारीख घोषित कर दी है।राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद इस बैठक में पूरी तैयारी और रणनीति के साथ हिस्सा लेगा। परिषद का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को राहत दिलाना और बिजली दरों में कमी सुनिश्चित कराना है। परिषद लगातार यह मुद्दा उठाता रहा है कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का लगभग 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस निकल रहा है, जिसके आधार पर बिजली दरों में कटौती की जानी चाहिए।
परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि प्रदेश में करीब 35 लाख ऐसे उपभोक्ता हैं, जो अपने घरों में छोटी-मोटी दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। वर्तमान व्यवस्था में विजिलेंस या विभागीय जांच के दौरान ऐसे उपभोक्ताओं पर अलग से व्यवसायिक बिजली कनेक्शन लेने का दबाव बनाया जाता है। कई मामलों में बिजली चोरी के मुकदमे तक दर्ज कर दिए जाते हैं।
उपभोक्ता परिषद ने मांग की है कि ऐसे गरीब उपभोक्ताओं को घरेलू श्रेणी में ही बिजली उपयोग की अनुमति दी जाए। परिषद का कहना है कि देश के कई राज्यों में यह व्यवस्था पहले से लागू है और उत्तर प्रदेश में भी इसे लागू किया जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर परिषद ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन और राज्य सरकार से 20 मई की बैठक में गरीब उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सात महत्वपूर्ण प्रस्ताव लाने की मांग की है। परिषद का मानना है कि यदि सरकार और पावर कॉरपोरेशन सकारात्मक निर्णय लेते हैं, तो इससे प्रदेश के 35 लाख से अधिक गरीब उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिल सकती है।
























