स्वामी दयानंद सरस्वती ने सुनाया राजा परीक्षित और नारद-विष्णु संवाद का प्रसंग
अमेठी,संवाददाता : विकासखंड भादर के घोरहा गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा वाचक स्वामी दयानंद सरस्वती ने राजा परीक्षित प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं का त्याग कर समाज और मानव कल्याण को सर्वोपरि रखा।

कथा के दौरान स्वामी दयानंद सरस्वती ने कहा कि सदैव लोकहित में कार्य करने वाले राजा परीक्षित के जीवन से समाज को प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने नैमिषारण्य तीर्थ का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि शौनकादिक 88 हजार ऋषियों ने पुराणवेत्ता सूतजी से प्रश्न किया था कि कलियुग में वेद-विद्या से दूर मनुष्यों को प्रभु भक्ति और मोक्ष की प्राप्ति किस प्रकार हो सकती है।

इस पर सूतजी ने नारद और भगवान विष्णु के संवाद का उल्लेख करते हुए बताया कि देवर्षि नारद लोक कल्याण की भावना से विभिन्न लोकों में भ्रमण करते हुए मृत्युलोक पहुंचे, जहां उन्होंने मनुष्यों को अपने कर्मों के कारण अनेक दुखों से पीड़ित देखा। इसके बाद नारदजी विष्णुलोक पहुंचे और भगवान विष्णु से मनुष्यों के दुख दूर करने का उपाय पूछा।

कथा वाचक ने बताया कि भगवान विष्णु ने नारदजी को लोककल्याण और आत्मोद्धार का मार्ग बताते हुए भक्ति और कथा श्रवण का महत्व समझाया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का रसपान किया।

इस अवसर पर मुख्य यजमान श्रीमती सूर्यकाली देवी, संतोष सिंह, राजेश कुमार, बृजेश कुमार, समर बहादुर सिंह, अभिमन्यु, मृत्युंजय, हितेश तथा पवन ओझा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
























