भगवान श्रीकृष्ण व सुदामा की मित्रता अनुकरणीय

अमेठी,संवाददाता : जिले के विकास खण्ड भादर स्थित घोरहा गांव में संतोष सिंह के यहां आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के अंतिम दिन कथा व्यास श्री श्री 1008 जगद्गुरु परमहंसाचार्य स्वामी दयानंद सरस्वती जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अनुपम मित्रता का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा में 99 लाख यदुवंशियों के आपसी संघर्ष और उनके विनाश का भी मार्मिक प्रसंग सुनाया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा व्यास महाराज ने बताया कि सुदामा अपनी पत्नी के बार-बार आग्रह करने पर अपने बाल सखा भगवान श्रीकृष्ण से मिलने द्वारिका पहुंचे। उनकी दयनीय अवस्था देखकर द्वारपालों ने उन्हें राजमहल के बाहर ही रोक दिया। तब सुदामा ने अपना परिचय देकर श्रीकृष्ण तक संदेश पहुंचाया। सुदामा का नाम सुनते ही भगवान श्रीकृष्ण नंगे पांव दौड़ते हुए उनके पास पहुंचे और उन्हें आदरपूर्वक राजमहल में ले गए।

उन्होंने कहा—
“देखि सुदामा की दीन दशा, करुणा करके करुणानिधि रोए,
पानी परात को हाथ छुयो नहि, नैनन से पग धोए।”
कथा में बताया गया कि सुदामा अपनी पत्नी द्वारा दिए गए चावल की पोटली छिपा रहे थे, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने प्रेमपूर्वक उसे लेकर दो मुट्ठी चावल खाए और सुदामा को दोनों लोकों का स्वामी बना दिया। स्वामी दयानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता आज भी समाज के लिए अनुकरणीय है। इस अवसर पर पवन ओझा, अनिल सिंह, सूर्यकली देवी, सुधा Singh, आस्था सिंह, प्रगति सिंह, प्रतिभा सिंह, संतोष, बृजेश, राजेश सिंह, शेखर सिंह, जितेन्द्र तिवारी सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे।





















