जगद्गुरु स्वामी दयानंद सरस्वती ने कहा— सत्संग मानव को सत्य और भलाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है

अमेठी,संवाददाता : जिले के विकास खंड भादर अंतर्गत घोरहा गांव में संतोष सिंह के यहां आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा के दौरान दूर-दराज के गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कथा का श्रवण किया। कथा व्यास पीठ से प्रवचन करते हुए श्री श्री 1008 जगद्गुरु परमहंसाचार्य स्वामी दयानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि सत्संग मनुष्य को भलाई और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा कल्पवृक्ष के समान है, जो श्रद्धा और निर्मल भाव से सुनने वाले मनुष्य की सभी इच्छाओं को पूर्ण करती है।

कथा के दौरान महाराज श्री ने “ईश्वर अंश जीव अविनाशी” से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया। साथ ही माता सती अनुसुइया के चरित्र की मार्मिक कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि नारद जी ने माता लक्ष्मी, पार्वती और ब्राह्माणी के समक्ष माता सती अनुसुइया की महानता का गुणगान किया। इसके बाद तीनों देवियों ने क्रमशः भगवान विष्णु, भगवान शिव और ब्रह्मा जी को उनकी परीक्षा लेने भेजा। तीनों देव साधु वेश धारण कर माता अनुसुइया के आश्रम पहुंचे और भोजन कराने का आग्रह किया। साधुओं ने शर्त रखी कि माता उन्हें नग्न अवस्था में भोजन कराएं, अन्यथा वे बिना भोजन किए लौट जाएंगे। माता अनुसुइया ने अपनी तपस्या के प्रभाव से तीनों को छह माह के बालक में परिवर्तित कर दिया और उन्हें पालने में झुलाते हुए दूध पिलाने लगीं।

कई महीनों बाद माता लक्ष्मी, पार्वती और ब्राह्माणी अपने पतियों को लेने पहुंचीं, लेकिन वे अपने-अपने पतियों को पहचान नहीं सकीं। इसके बाद माता अनुसुइया ने उन्हें उनके वास्तविक स्वरूप में वापस कर दिया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इस अवसर पर पवन ओझा, अनिल सिंह, आरुष सिंह, शेखर, सनी, दीपक, शान, देवमणि, राजेश कुमार सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।






















