“आतंकवाद और हिंसा से पीड़ित दुनिया को बुद्ध की जरूरत, मध्यम मार्ग सबके लिए कल्याणकारी” — भंते धम्म ज्योति
अमेठी/भेंटुआ, संवाददाता : बौद्ध तीर्थ स्थलों के सफल भ्रमण से वापस लौटने के उपलक्ष्य में सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर गुरुचरण बौद्ध द्वारा अपने पैतृक गांव घटकौर में एक विशाल धार्मिक आयोजन किया गया। ‘बुद्ध चरित्र चंद्रोदय पाठ’ के भव्य समापन के बाद शुक्रवार को एक दिवसीय बौद्ध धम्म सम्मेलन और ‘भीमभोज’ का आयोजन हुआ, जिसमें बीस हजार से अधिक लोगों ने सहभागिता की। इस दौरान बिरहा गायक भल्लू बावरा और उनकी टीम ने अम्बेडकर मिशन के गीतों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह का जागृतिपूर्ण मनोरंजन किया।

त्रिसरण पंचशील के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत बौद्ध धम्म की परंपरा के अनुरूप सामूहिक त्रिसरण पंचशील के साथ की गई। आयोजनकर्ता सेवानिवृत्त डिप्टी रेंजर गुरुचरण बौद्ध, उनकी पत्नी रामपती और परिवार के सदस्यों ने दूर-दराज से आए अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत व सम्मान किया। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं को अंगवस्त्र और पंचशील पट्टिका भेंटकर सम्मानित भी किया गया। सम्मेलन में अमेठी सहित सुल्तानपुर, रायबरेली, अयोध्या और अम्बेडकरनगर से हजारों की संख्या में बौद्ध धम्म के अनुयाई और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
अंधविश्वास और कर्मकांड से मुक्त है बौद्ध धम्म
सम्मेलन को संबोधित करते हुए भंते धम्म ज्योति ने बौद्ध धम्म को ‘वैज्ञानिक धम्म’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि बौद्ध धम्म पूरी तरह तर्क और तथ्य के सिद्धांत पर आधारित है; यहाँ अंधविश्वास, कर्मकाण्ड और अवैज्ञानिक मान्यताओं के लिए कोई स्थान नहीं है। कार्यक्रम का कुशल संचालन एडवोकेट चंदन भीम, तुलसी राम शास्त्री और राम समुझ बौद्ध द्वारा किया गया।
सैकड़ों संगठनों और शिक्षकों का मिला अनुकरणीय सहयोग
इस विशाल आयोजन की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में बहुजन समाज पार्टी, बामसेफ, अम्बेडकर सेवा समिति, अम्बेडकर कल्याण समिति और भीम आर्मी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इसके साथ ही एस सी/एस … टी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन और उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ से जुड़े सैकड़ों शिक्षकों ने भी कार्यक्रम में मौजूद रहकर व्यवस्था को सफल बनाने में सराहनीय योगदान दिया।
दुनिया को युद्ध नहीं बुद्ध की जरूरत
जगदीशपुर से पधारे बौद्ध भिक्षु भंते धम्म ज्योति ने उपस्थित जनसमूह को भगवान बुद्ध की मूल शिक्षाओं के साथ-साथ बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर और सम्राट अशोक महान द्वारा बौद्ध धम्म के पुनरुत्थान के लिए किए गए ऐतिहासिक कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने अपने संबोधन में विशेष रूप से रेखांकित किया कि भगवान बुद्ध ने अपने संघ में बिना किसी भेदभाव के सबको प्रवज्या प्रदान की। तथागत का धम्म समता, समानता, करुणा, मैत्री और शांति का शाश्वत संदेश देता है। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया आतंकवाद और हिंसा की विभीषिका से पीड़ित है, तब तथागत बुद्ध की शिक्षाओं की प्रासंगिकता और अधिक बढ़ गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि युद्ध से कभी भी किसी भी समस्या का स्थायी हल नहीं हुआ है; आज संपूर्ण विश्व को युद्ध की नहीं, बल्कि बुद्ध के दिखाए करुणा के मार्ग की सख्त जरूरत है।
प्रमुख रूप से उपस्थित रहे गणमान्य नागरिक
इस ऐतिहासिक सम्मेलन में भारतीय बौद्ध महासभा के अध्यक्ष श्याम बहादुर बौद्ध, बामसेफ के जिला संयोजक संजीव भारती, अम्बेडकर कल्याण समिति के पूर्व जिला अध्यक्ष हौसिला प्रसाद भीम, एडवोकेट मेवालाल, डॉ. जयभीम बौद्ध, अम्बेडकर सेवा समिति के जिला अध्यक्ष संजय कुमार शास्त्री, जिला पंचायत सदस्य सूबेदार यादव, सेवा निवृत्त शिक्षक शिवहर्ष, बामसेफ के जिला सह-संयोजक राम चन्द्र बौद्ध, इन्द्र पाल गौतम, धर्मेंद्र कुमार बौद्ध, फूल चंद्र बौद्ध, राम सजीवन कोरी मंझवारा, वन दरोगा उदयराज, श्रीराम (प्रधानाध्यापक), एलआईसी के डिविजनल मैनेजर मोती राम, राम चन्द्र सरस, श्याम लाल, ललित कुमार, पूर्व प्रधान हरिनाथ, सुरेन्द्र कुमार, बसपा के विधानसभा प्रभारी शमशेर बौद्ध, विधानसभा अध्यक्ष लक्ष्मण प्रसाद, विधानसभा महासचिव श्याम कुमार, श्री राम, सेवानिवृत्त बैंक मैनेजर रामदेव, राम सुंदर, विक्रम बौद्ध, वीरेंद्र कुमार राव, किशुन पाल, किशोरी लाल, विक्रांत कुमार एडवोकेट, सत्येन्द्र कुमार एडवोकेट, बृजेश कुमार, राम कुमार, एडवोकेट कर्मेन्द्र गौतम, चंद्र प्रकाश, शिवनाथ बौद्ध, भीमसागर बौद्ध, मनोज कुमार, बृजेश जायसवाल, रामफेर बौद्ध, शीतला प्रसाद यादव आदि सैकड़ों संभ्रांत जन मौजूद रहे।





















