बिहार पुलिस के जवाब पर जताया अविश्वास, मालखानों में सबूतों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
नई दिल्ली : भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार पुलिस की उस दलील पर कड़ी नाराजगी जताई है, जिसमें कहा गया था कि भ्रष्टाचार के एक मामले में जब्त किए गए रिश्वत के नोटों को चूहों ने कुतरकर नष्ट कर दिया। न्यायमूर्ति जे.बी. परदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस स्पष्टीकरण पर अविश्वास जताते हुए संकेत दिए कि बिहार पुलिस मालखानों में साक्ष्यों के रखरखाव की व्यवस्था की गहन समीक्षा की जाएगी। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दावा बेहद हैरान करने वाला है कि करेंसी नोटों को चूहों ने नष्ट कर दिया। अदालत ने कहा कि यदि इस प्रकार की घटनाएं हो रही हैं, तो यह राज्य के राजस्व की बड़ी हानि है और यह सवाल उठता है कि ऐसे कितने मामलों में बरामद राशि सुरक्षित नहीं रखी जा रही होगी।
क्या है मामला
पूरा मामला वर्ष 2019 का है, जब बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक ट्रैप ऑपरेशन के दौरान महिला बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। जब्त रकम को प्राथमिक साक्ष्य के रूप में सील कर पुलिस मालखाने में जमा कराया गया था। हालांकि ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष अदालत में वे नोट पेश नहीं कर सका। इस पर पुलिस की ओर से बताया गया कि मालखाने में रखे लिफाफे को चूहों ने कुतर दिया, जिससे नोट नष्ट हो गए।
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का अलग रुख
निचली अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में महिला अधिकारी को बरी कर दिया था, लेकिन बाद में पटना उच्च न्यायालय ने इस फैसले को पलटते हुए दोषसिद्धि कर सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने माना था कि मालखाना रजिस्टर और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य पर्याप्त हैं। अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला अधिकारी को जमानत देते हुए उसकी चार वर्ष की सजा पर रोक लगा दी है।
मालखानों की व्यवस्था पर होगी समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले को केवल एक आपराधिक मुकदमे तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि बिहार में पुलिस मालखानों में साक्ष्य प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक जांच पर भी विचार करेगा। अदालत ने कहा कि अंतिम सुनवाई के दौरान इस पूरे मुद्दे पर विस्तार से विचार किया जाएगा।
























