फ्री इलाज के नाम पर वसूली, गलत सर्जरी से बिगड़ी हालत
भोपाल, संवाददाता : आयुष्मान भारत योजना का लाभ दिलाने के नाम पर निजी अस्पतालों द्वारा मरीजों के साथ धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल की जांच में विदिशा के एक मरीज के साथ लापरवाही की पुष्टि हुई है। विदिशा निवासी विवेक यादव ने आरोप लगाया कि करोंद बायपास स्थित एक निजी अस्पताल ने आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त इलाज का लालच देकर गलत उपचार किया, जिससे वह 40 प्रतिशत विकलांग हो गया।
बिना मान्यता के किया भर्ती
जांच में सामने आया कि संबंधित अस्पताल का ऑर्थोपेडिक और ट्रॉमा विभाग आयुष्मान योजना में मान्यता प्राप्त नहीं था, फिर भी मरीज को योजना के तहत भर्ती किया गया। अस्पताल ने दूसरी बीमारी के नाम पर इलाज किया और मुफ्त उपचार के बजाय सीटी स्कैन के लिए 4500 रुपये भी वसूले।
समय पर इलाज न मिलने से बिगड़ी हालत
मरीज के अनुसार, अस्पताल ने केवल चेहरे का उपचार किया, जबकि कूल्हे के फ्रैक्चर का समय पर इलाज नहीं किया गया। बाद में हालत बिगड़ने पर जब वह एम्स भोपाल पहुंचा, तो डॉक्टरों ने बताया कि सर्जरी ठीक से नहीं हुई और कूल्हे का फ्रैक्चर पहले ही ठीक किया जाता तो स्थिति सामान्य हो सकती थी। मेडिकल काउंसिल की जांच में अस्पताल द्वारा जारी दो अलग-अलग डिस्चार्ज कार्ड पाए गए। जांच समिति ने इसे गंभीर अनियमितता माना।
डॉक्टर की सफाई
आरोपों पर डॉक्टर ने सफाई देते हुए कहा कि मरीज एक्सीडेंट के 24 घंटे बाद गंभीर स्थिति में आया था और सेप्सिस से ग्रस्त था। उन्होंने बताया कि परिजनों की सहमति से विशेषज्ञों की सलाह पर उपचार किया गया।
काउंसिल की टिप्पणी
मेडिकल काउंसिल की एथिक्स कमेटी ने डॉक्टर की दलील को खारिज करते हुए कहा कि 24 घंटे में किसी मरीज में गंभीर सेप्सिस होना संभव नहीं है। समिति ने माना कि आयुष्मान योजना का लाभ लेने के लिए गलत डायग्नोसिस दर्ज किया गया। काउंसिल ने डॉक्टर को भविष्य में आयुष्मान योजना की निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही इलाज करने की चेतावनी दी है। यह मामला आयुष्मान योजना के दुरुपयोग और निजी अस्पतालों की लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।






















