भड़काऊ नारों से कैंपस की शांति भंग होने की आशंका
नई दिल्ली, संवाददाता : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में सोमवार देर रात एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया। साबरमती हॉस्टल के बाहर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ भड़काऊ और आपत्तिजनक नारे लगाए गए। कार्यक्रम के वीडियो सामने आने के बाद यह मामला तूल पकड़ गया।
बताया जा रहा है कि यह प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2020 दिल्ली दंगों की साजिश मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद हुआ। 5 जनवरी 2026 को आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद वामपंथी छात्र संगठनों SFI, DSF और AISA से जुड़े करीब 30–35 छात्रों ने ‘गुरिल्ला ढाबा’ के पास विरोध प्रदर्शन किया। शुरुआत में यह कार्यक्रम 2020 में हुई JNU हिंसा की छठी बरसी से जुड़ा था, लेकिन बाद में नारे विवादित हो गए।
वीडियो फुटेज में छात्रों को प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाते हुए सुना गया, साथ ही सरकार और कॉरपोरेट घरानों के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। घटना के समय विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मी मौके पर मौजूद थे और पूरी गतिविधि की निगरानी की गई।
प्रशासन ने मांगी FIR
JNU प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर FIR दर्ज करने की मांग की है। मुख्य सुरक्षा अधिकारी द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि लगाए गए नारे अत्यंत आपत्तिजनक, भड़काऊ और उत्तेजक हैं, जो न केवल विश्वविद्यालय की आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट की अवमानना और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं।
शिकायत पत्र में कुछ छात्रों की पहचान भी की गई है, जिनमें JNUSU पदाधिकारी और अन्य छात्र शामिल बताए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की गतिविधियों से कैंपस की शांति और सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
JNU प्रशासन का सख्त रुख
विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक असहमति और घृणास्पद या भड़काऊ भाषण के बीच स्पष्ट अंतर है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि कैंपस में शांति भंग करने और कानून व्यवस्था को खतरे में डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
























