कड़े नियमों के बीच दो पालियों में संपन्न हुई परीक्षा
लखनऊ : संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की प्रारंभिक परीक्षा-2026 रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुई। लखनऊ के 86 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में कुल 37,686 अभ्यर्थी शामिल हुए। इस बार के प्रश्नपत्र में दुनिया भर में चर्चा का विषय बने ‘हार्मूज जलडमरुमध्य’ की भौगोलिक स्थिति और युद्ध में ‘ड्रोन’ के इस्तेमाल व उसकी गति से जुड़े गणितीय सवालों ने अभ्यर्थियों को खासा उलझाया। इसके अलावा, मुंशी प्रेमचंद के उपन्यास के कथनों के जरिए जमींदारी व्यवस्था और चराई भूमि पर भी सवाल पूछे गए।

दो पालियों में हुई परीक्षा, सीसैट ने भी लिया इम्तिहान
प्रारंभिक परीक्षा दो पालियों में आयोजित की गई थी:
- प्रथम प्रश्नपत्र (सामान्य अध्ययन): सुबह 9:30 से 11:30 बजे तक हुआ, जिसमें 100 प्रश्न थे और प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का था। मेरिट इसी प्रश्नपत्र के आधार पर तैयार की जाएगी।
- द्वितीय प्रश्नपत्र (सीसैट): दोपहर 2:30 से 4:30 बजे तक हुआ, जिसमें 80 प्रश्न थे और प्रत्येक प्रश्न 2.5 अंक का था। यह केवल क्वालिफाइंग (33 प्रतिशत अंक अनिवार्य) पेपर था।
आधे घंटे पहले बंद हुए गेट, देरी से पहुंचे छात्रों को नहीं मिला प्रवेश

आयोग के सख्त नियमों के चलते दोनों पालियों में परीक्षा शुरू होने से ठीक आधे घंटे पहले मुख्य गेट बंद कर दिए गए। महाराजा बिजली पासी कॉलेज, सुभाष कॉलेज (अलीगंज) और लोक सेवा आयोग केंद्र पर देरी से पहुंचे कई अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं दिया गया, जिससे वे निराश लौटे। परीक्षा कक्ष में जाने से पहले गहन चेकिंग की गई। मोबाइल, स्मार्ट वॉच, ईयरफोन, ब्लूटूथ, धूप के चश्मे और यहाँ तक कि साधारण पेन ले जाने पर भी रोक थी। अभ्यर्थियों को केवल पारदर्शी पानी की बोतल और दवाएं ले जाने की ही अनुमति थी।
प्रश्नपत्र पर क्या बोले अभ्यर्थी?
- हिमांशु (प्रथम प्रयास): पेपर अच्छा हुआ है। गणित के सवाल थोड़े कठिन थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार का स्तर ‘मॉडरेट’ (मध्यम) ही कहा जाएगा।
- सौम्या वर्मा (तीसरा प्रयास): इस बार सभी विषयों को समान महत्व नहीं मिला। भारतीय राजव्यवस्था (पॉलिटी) और भूगोल से जुड़े प्रश्न इस बार लगभग गायब ही थे।
- शिवेंद्र कुमार (लखीमपुर खीरी, प्रथम प्रयास): पेपर काफी कठिन था। प्रश्नों को समझने से ज्यादा समय विकल्पों को समझने और सही उत्तर खोजने में लग गया।
- नगमा (आजमगढ़, प्रथम प्रयास): अब रटने वाली पढ़ाई से काम नहीं चलेगा, कांसेप्ट मजबूत होना जरूरी है। प्रश्न और उनके विकल्प इतने लंबे थे कि उन्हें पढ़ने और सही उत्तर तलाशने में काफी समय लगा।
























