“यह खेल जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
नई दिल्ली: भारतीय निशानेबाजी जगत के दिग्गज खिलाड़ी और प्रतिष्ठित कोच जसपाल राणा के असामयिक निधन पर पूरे खेल जगत में शोक की लहर है। राणा का शुक्रवार तड़के दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया, वह 49 वर्ष के थे। उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित खेल जगत की कई हस्तियों ने गहरा दुख व्यक्त किया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू:
राष्ट्रपति मुर्मू ने ‘एक्स’ (ट्विटर) पर जारी संदेश में कहा: “जसपाल राणा जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। वह एक प्रख्यात निशानेबाज थे, जिनके उत्कृष्ट प्रदर्शन ने देश को गौरवान्वित किया। एक खिलाड़ी और मार्गदर्शक के रूप में उन्होंने युवा प्रतिभाओं को निखारकर खेल जगत में अमिट योगदान दिया। उनका समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी:
प्रधानमंत्री मोदी ने दुख व्यक्त करते हुए लिखा कि राणा ने निशानेबाजी में अपनी असाधारण उपलब्धियों से देश का गौरव बढ़ाया तथा एक कोच के रूप में युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई। “जसपाल राणा जी के निधन से मुझे गहरा दुख हुआ है। उत्कृष्टता, अनुशासन और खेल जगत के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें अपार सराहना दिलाई। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, मित्रों और संपूर्ण खेल जगत के साथ हैं। ओम शांति।”
खेल मंत्री मनसुख मांडविया:
खेल मंत्री ने भारतीय निशानेबाजी में राणा के योगदान को याद करते हुए कहा: “एक चैंपियन एथलीट और बेहतरीन मेंटोर के तौर पर देश के लिए उनके शानदार योगदान ने एक प्रेरणादायक विरासत छोड़ी है।” “उनके परिवार, दोस्तों और खेल जगत से जुड़े लोगों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।”
खेल जगत की दिग्गज हस्तियों की प्रतिक्रियाएं
- अभिनव बिंद्रा (ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता): “जसपाल भारतीय टीम में मेरे साथी थे और उस पीढ़ी का हिस्सा थे, जिसने भारतीय निशानेबाजी को नई दिशा दी। वे बहुत जुनूनी और प्रतिभाशाली थे।”
- गगन नारंग (ओलंपिक कांस्य पदक विजेता व कोच): “जब मैं पहली बार रेंज में गया, तो हम सभी जसपाल भाई का नाम बड़ी श्रद्धा से लेते थे। वह मेरे हीरो थे। भारतीय निशानेबाजी की नींव उन्हीं के कंधों पर टिकी है।”
- विजय कुमार (लंदन ओलंपिक रजत पदक विजेता): “राणा जी एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों में मेरे साथी थे। कुछ दिन पहले ही पता चला था कि तबीयत ठीक नहीं है, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि वे हमें इस तरह छोड़कर चले जाएंगे। मैं स्तब्ध हूँ।”
अंतिम विदाई: जसपाल राणा ने न केवल खुद पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया, बल्कि एक सफल कोच के रूप में देश को कई नए चैंपियन भी दिए। उनका जाना भारतीय खेल इतिहास के एक सुनहरे अध्याय का अंत है।























