घर बैठे शिकायत और नल कनेक्शन की सुविधा
लखनऊ, संवाददाता : प्रदेश सरकार जल जीवन मिशन को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के अभियान में अब ‘जल सारथी’ मोबाइल ऐप अहम भूमिका निभा रहा है। इस ऐप के जरिए ग्रामीणों को योजनाओं की लाइव जानकारी मिलने के साथ ही शिकायत दर्ज कराने और उसके समाधान की सुविधा भी उपलब्ध हो रही है।
नमामि गंगे तथा ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रभास कुमार ने बताया कि ‘जल सारथी’ ऐप के माध्यम से राज्य से लेकर गांव स्तर तक चल रही परियोजनाओं की लाइव मॉनिटरिंग संभव हो गई है। मल्टी लेवल डैशबोर्ड के जरिए किसी भी गांव में पानी की टंकी, पाइपलाइन और घरेलू नल कनेक्शन की स्थिति एक क्लिक पर देखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 75 जिलों की करीब 58 हजार ग्राम पंचायतों में लगभग 40 हजार परियोजनाओं के माध्यम से हर घर तक जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इन सभी परियोजनाओं को ऐप से ऑनलाइन जोड़ा जा रहा है, ताकि उनकी वास्तविक स्थिति की निगरानी की जा सके।
स्रोत से टोटी तक निगरानी
‘जल सारथी’ ऐप में जियो टैगिंग आधारित व्यवस्था लागू की गई है। गांवों में पाइपलाइन, टंकी या नल कनेक्शन का कार्य पूरा होते ही उसकी जानकारी ऐप पर अपडेट हो जाती है। इससे विभाग पानी के स्रोत से लेकर घरों में लगी टोटी तक पूरी प्रणाली पर नजर रख पा रहा है। पाइपलाइन, मोटर और टंकी जैसी परिसंपत्तियों का संचालन भी इसी माध्यम से ट्रैक किया जा रहा है।
शिकायत के लिए नहीं लगाने पड़ेंगे चक्कर
ग्रामीण अब ऐप के जरिए नए नल कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं और जलापूर्ति से जुड़ी समस्याओं की शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं। ऐप पर प्लंबर, ग्राम प्रधान और जल निगम अधिकारियों के मोबाइल नंबर उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ऐप के माध्यम से पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की मरम्मत की स्थिति भी देखी जा सकती है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार मिशन के तहत लगभग दो लाख किलोमीटर सड़कें खोदी गई थीं, जिनमें से 1.94 लाख किलोमीटर से अधिक सड़कों का पुनर्निर्माण पूरा किया जा चुका है।
पानी की गुणवत्ता पर भी नजर
सरकार जलापूर्ति के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। ग्राम स्तर पर फील्ड टेस्ट किट के जरिए पानी की जांच की जिम्मेदारी स्थानीय महिलाओं को दी गई है। इन महिलाओं का विवरण भी ऐप पर उपलब्ध है, जिससे ग्रामीण स्वयं उनकी पुष्टि कर सकते हैं और जवाबदेही सुनिश्चित हो रही है।
























