फाइनल होने के बाद उम्मीदवारों को पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने के निर्देश दिए जाएंगे
लखनऊ,संवाददाता : समाजवादी पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक रणनीति पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। पार्टी नेतृत्व इस बार चुनावी तैयारियों को बेहद सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है, ताकि संगठनात्मक स्तर पर किसी तरह की असहमति या नुकसान से बचा जा सके। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने फैसला किया है कि जिन विधानसभा क्षेत्रों में उम्मीदवारों के नाम लगभग तय हो जाएंगे, वहीं चुनावी रैलियों और बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। पार्टी का मानना है कि टिकट घोषित किए बिना किसी क्षेत्र में बड़ी रैली करने से कई बार संगठन के भीतर विवाद और असंतोष पैदा हो जाता है, जिसका असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
टिकट तय होने के बाद ही होगी चुनावी गतिविधियां तेज
सपा नेतृत्व ने स्पष्ट रणनीति बनाई है कि पहले संबंधित विधानसभा सीट पर उम्मीदवार का नाम तय किया जाएगा और उसके बाद ही उस क्षेत्र में बड़ी जनसभा या रैली आयोजित की जाएगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार कई बार टिकट के दावेदार अपनी दावेदारी मजबूत दिखाने के लिए रैलियों और कार्यक्रमों में भारी संसाधन खर्च करते हैं, लेकिन बाद में टिकट किसी दूसरे नेता को मिल जाता है। ऐसी स्थिति में नाराजगी बढ़ती है और कुछ नेता पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ ही काम करने लगते हैं। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए पार्टी इस बार पहले टिकट वितरण को लेकर स्थिति स्पष्ट करना चाहती है, ताकि चुनाव के दौरान किसी तरह का आंतरिक विरोध सामने न आए।
कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच तालमेल पर जोर
समाजवादी पार्टी इस बार संगठन के अंदर बेहतर तालमेल बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दे रही है। पार्टी चाहती है कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और नेताओं के बीच किसी तरह का टकराव या विरोध न्यूनतम रहे। पार्टी का मानना है कि यदि टिकट को लेकर भ्रम की स्थिति बनी रहती है तो चुनाव के समय संगठन कमजोर पड़ सकता है। इसलिए उम्मीदवार तय होने के बाद सभी स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर चुनाव प्रचार में जुटने की अपील की जाएगी।
उम्मीदवारों को पहले से दी जाएगी जिम्मेदारी
पार्टी नेतृत्व की योजना है कि टिकट फाइनल होने के बाद उम्मीदवारों को पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने के निर्देश दिए जाएंगे। उन्हें क्षेत्र में सक्रिय होकर जनसंपर्क बढ़ाने, बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने और स्थानीय समीकरण साधने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इसके बाद पार्टी के प्रमुख नेताओं की रैलियां आयोजित कर चुनावी माहौल बनाने की तैयारी की जाएगी। माना जा रहा है कि इस रणनीति के जरिए पार्टी चुनावी तैयारियों को ज्यादा प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना चाहती है।
ओमप्रकाश राजभर के बयानों पर भी बनी रणनीति
इसी बीच ओमप्रकाश राजभर लगातार समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव पर हमलावर नजर आ रहे हैं। राजभर कई मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से सपा नेतृत्व की आलोचना कर चुके हैं। इन बयानों को लेकर भी पार्टी ने अपनी रणनीति तय कर ली है। सपा नेतृत्व ने फैसला किया है कि ओमप्रकाश राजभर के बयानों का जवाब अब सपा महिला विंग की प्रदेश अध्यक्ष सीमा राजभर देंगी।
सीमा राजभर को मिली जिम्मेदारी
सीमा राजभर पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से जुड़ी रही हैं और बाद में समाजवादी पार्टी में शामिल हुई थीं। पार्टी को लगता है कि राजभर समाज और संगठन दोनों की समझ रखने वाली सीमा राजभर इस मुद्दे पर प्रभावी तरीके से जवाब दे सकती हैं। सूत्रों के अनुसार सपा ने अपने नेताओं और प्रवक्ताओं को भी निर्देश दिया है कि ओमप्रकाश राजभर के बयानों पर अनावश्यक प्रतिक्रिया देने से बचें और तय रणनीति के तहत ही जवाब दिया जाए।
संगठन मजबूत करने पर विशेष जोर
समाजवादी पार्टी फिलहाल संगठन को मजबूत करने, आंतरिक असंतोष कम करने और चुनावी रणनीति को व्यवस्थित तरीके से लागू करने पर जोर दे रही है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि स्पष्ट टिकट वितरण और नियंत्रित चुनावी अभियान से उसे आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक लाभ मिल सकता है।






















