ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र
दिनांक: 02 मार्च 2026
दिन: सोमवार
विक्रम संवत: 2082
शक संवत: 1947
अयन: उत्तरायण
ऋतु: वसंत ऋतु
मास: फाल्गुन
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: चतुर्दशी सायं 05:18 तक, तत्पश्चात पूर्णिमा
नक्षत्र: अश्लेशा प्रातः 07:24 तक, तत्पश्चात मघा
योग: अतिगण्ड दोपहर 12:06 तक, तत्पश्चात सुकर्मा
राहुकाल: प्रातः 07:30 से 09:00 तक
सूर्योदय: 06:14
सूर्यास्त: 05:46
दिशाशूल: पश्चिम दिशा में
व्रत पर्व: पूर्णिमा
03 मार्च 2026 को खण्डग्रास चन्द्रग्रहण
03 मार्च 2026, मंगलवार को खण्डग्रास चन्द्रग्रहण होगा। यह ग्रहण भारत में आंशिक रूप से दिखाई देगा। भारतवर्ष में ग्रहण का स्पर्श एवं प्रारंभ दिखाई नहीं देगा, केवल मोक्ष काल के समय यह दृश्य होगा।
भारत में दृश्य समय: सायं 06:00 बजे
ग्रहण मोक्ष: सायं 06:48 बजे
सूतक काल प्रारंभ: प्रातः 09:00 बजे (स्पर्श समय से 9 घंटे पूर्व)
चंद्र ग्रहण मंत्र
ग्रहण के समय निम्न मंत्र की एक माला जप करना शुभ माना गया है:
ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः
ग्रहण काल में क्या करें, क्या न करें
- ग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से अनेक गुना फल प्राप्त होता है।
- सूर्यग्रहण में 12 घंटे पूर्व तथा चन्द्रग्रहण में 9 घंटे पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। वृद्ध, बालक एवं रोगी 4.5 घंटे पूर्व तक भोजन कर सकते हैं।
- सूतक लगने पर मंदिर प्रवेश, मूर्ति स्पर्श, भोजन, मैथुन, यात्रा आदि कार्य वर्जित हैं।
- ग्रहण प्रारंभ के समय स्नान, मध्य में हवन-पूजन तथा अंत में वस्त्र सहित स्नान करना चाहिए।
- ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्ध चन्द्र दर्शन कर ही भोजन करें।
- ग्रहण काल में किसी भी प्रकार का शुभ या नया कार्य आरंभ न करें।
- पत्ते, तिनके, लकड़ी, फूल न तोड़ें; दंतधावन न करें; वस्त्र न निचोड़ें।
- गायों को घास, पक्षियों को अन्न तथा जरूरतमंदों को वस्त्रदान करना पुण्यदायक माना गया है।
- गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
राशियों पर प्रभाव
अशुभ फलकारक:
मेष, वृष, कर्क, सिंह, कन्या, धनु, मकर, कुंभ
शुभ फलकारक:
मिथुन, तुला, वृश्चिक, मीन
विशेष सावधानी:
सिंह राशि एवं पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के जातकों के लिए यह ग्रहण विशेष अनिष्टकारक माना गया है। ऐसे जातक ग्रहण काल में घर पर रहें तथा अपने इष्ट या गुरु मंत्र का जप करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार चन्द्रग्रहण के समय किया गया जप, ध्यान और दान सामान्य दिनों की अपेक्षा अत्यंत फलदायी माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक आचरण करना हितकारी है।
























