एक ही दिन में रिकॉर्ड 274 लोगों के एवरेस्ट फतह करने के ऐतिहासिक जश्न के बीच आई बेहद दुखद खबर
काठमांडू/नई दिल्ली : विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। एवरेस्ट के शिखर पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराने के बाद नीचे उतरते समय दो भारतीय पर्वतारोहियों की मौत हो गई। नेपाल अभियान संचालक संघ (एक्सपेडिशन ऑपरेटर्स एसोसिएशन) के महासचिव ऋषि भंडारी ने शुक्रवार को इस दर्दनाक हादसे की आधिकारिक पुष्टि की है। मृतक पर्वतारोहियों की पहचान अरुण कुमार तिवारी और संदीप अरे के रूप में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पर्वतारोही शिखर से नीचे आते वक्त अत्यधिक थकान और ऑक्सीजन की कमी (हाइपोक्सिया) के कारण गंभीर रूप से निढाल हो गए थे।
गाइडों ने बचाने के लिए झोंक दी थी पूरी ताकत
एसोसिएशन के महासचिव ऋषि भंडारी ने बताया कि चोटी से उतरते समय दोनों भारतीयों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। उनके साथ मौजूद शेरपा गाइडों ने उन्हें बचाने और सुरक्षित नीचे लाने के लिए बहुत मेहनत की और हर संभव प्रयास किए, लेकिन अत्यधिक ऊंचाई और थकान के कारण दोनों को बचाया नहीं जा सका। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संदीप अरे की मौत बृहस्पतिवार को हुई, जबकि अरुण तिवारी की मौत के सटीक समय की विस्तृत जानकारी की अभी प्रतीक्षा की जा रही है। बताया जा रहा है कि संदीप ने बुधवार को और तिवारी ने बृहस्पतिवार शाम करीब 5:30 बजे एवरेस्ट के शिखर पर कदम रखा था।
एक दिन में सबसे अधिक चढ़ाई का बना था नया रिकॉर्ड
यह दुखद हादसा ऐसे समय में हुआ है जब एवरेस्ट पर एक ही दिन में सबसे अधिक चढ़ाई करने का एक नया विश्व रिकॉर्ड दर्ज किया गया था।
- ऐतिहासिक रिकॉर्ड: बुधवार को संदीप अरे सहित कुल 274 पर्वतारोहियों ने एक साथ माउंट एवरेस्ट के शिखर पर सफलतापूर्वक फतह हासिल की थी। यह इतिहास में एक ही दिन में दर्ज की गई सबसे अधिक सफल चढ़ाइयां हैं।
- नेपाली शेरपाओं का साथ: इस रिकॉर्ड चढ़ाई में 150 नेपाली शेरपा भी शामिल थे, जिन्होंने पर्वतारोहियों का मार्गदर्शन किया।
- शिखर पर पहुंचे अन्य भारतीय: इस ऐतिहासिक जत्थे में संदीप अरे के अलावा दो अन्य भारतीय पर्वतारोही तुलसी रेड्डी पालपुनूरी और अजय पाल सिंह धालीवाल भी शामिल थे, जिन्होंने सुरक्षित चढ़ाई पूरी की। इसके अगले दिन यानी बृहस्पतिवार को भारत के ही लक्ष्मीकांत मंडल ने भी विश्व की सबसे ऊंची चोटी को फतह करने का गौरव प्राप्त किया।
सफलता के इस ऐतिहासिक कीर्तिमान के बीच दो भारतीय जांबाजों की मौत से पर्वतारोहण जगत और उनके परिवारों में गहरा शोक छा गया है। दोनों के शवों को नीचे लाने और आगे की औपचारिकताएं पूरी करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
























