बोले- कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास जनहित के सिद्धांतों पर हो आधारित
दिल्ली/एवियन : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 देशों के मंच पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर भारत के ‘मानव’ विजन को दुनिया के सामने रखा है। जी-7 देशों के 52वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने फ्रांस के एवियन पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार रात “इंश्योरिंग ए सेफ, रैपिड एंड एफिशिएंट रोल आउट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है जिसमें मानव सभ्यता की दिशा को फिर से परिभाषित करने की क्षमता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को सशक्त बनाना होना चाहिए।
भारत के ‘मानव’ विजन पर दिया जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने विस्तार से बताया कि इसी व्यापक और लोक-कल्याणकारी सोच के साथ भारत ने हाल ही में ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ की मेजबानी की थी। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत का ‘मानव’ विजन इस बात पर जोर देता है कि एआई का विकास पूरी तरह से समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर टिका होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत ने हमेशा साइबरस्पेस को एक वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में देखा है। लोकतांत्रिक देशों के पास ऐसे एआई मॉडल होने चाहिए जो उनके महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे को सुरक्षित कर सकें और साइबर खतरों से निपटने में उनकी मदद कर सकें।
प्रधानमंत्री के 4 मुख्य सुझाव
प्रधानमंत्री ने एआई विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें सुरक्षा, गति और दक्षता पर एक साथ ध्यान दिया जाए। इस संबंध में उन्होंने वैश्विक समुदाय के सामने चार महत्वपूर्ण सुझाव रखे:
- सेफ-बाय-डिजाइन: एआई सिस्टम को निर्माण के स्तर पर ही पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाना चाहिए।
- समान मानक और नियम: एआई के इस्तेमाल के साथ-साथ पूरी दुनिया में इसके लिए सामान्य मानक, परीक्षण फ्रेमवर्क और नियामक दिशानिर्देश होने चाहिए।
- वैश्विक सहयोग: डीपफेक, गलत सूचना (मिसइन्फॉर्मेशन) और साइबर धोखाधड़ी जैसी बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रभावी वैश्विक सहयोग तंत्र तैयार किया जाए।
- ग्लोबल साउथ का विकास: एक समावेशी दुनिया सुनिश्चित करने के लिए एआई तकनीक का लाभ विकासशील और ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों तक अनिवार्य रूप से पहुँचना चाहिए।
मानव गरिमा की रक्षा ही अंतिम उद्देश्य
अपने संबोधन का समापन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का असली उद्देश्य मानव क्षमता का विस्तार करना, मानवीय विकल्पों को सशक्त बनाना और मानव गरिमा की रक्षा करना होना चाहिए। उन्होंने दुनिया को आश्वस्त किया कि भारत इन उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए अपने सभी वैश्विक सहयोगियों के साथ मिलकर लगातार काम करता रहेगा।























