सुख-समृद्धि के लिए कामधेनु गाय की नियमित करें पूजा
नई दिल्ली, संवाददाता : आपने अक्सर कई घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में गाय की एक विशेष प्रतिमा रखी जरूर देखी होगी, जिसे ‘कामधेनु गाय’ कहा जाता है। सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि कामधेनु गाय में 33 प्रकार (कोटि) के देवी-देवताओं का वास होता है और यह सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली मानी जाती हैं। यही वजह है कि लोग अपने घर में शुभता के संचार के लिए इनकी मूर्ति स्थापित करते हैं। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित प्रवीण मिश्र ने विस्तार से बताया है कि कामधेनु गाय की प्रतिमा को किस दिशा में रखना चाहिए और इसके क्या-क्या चमत्कारी लाभ हैं।
वास्तु शास्त्र के अनुसार सबसे शुभ दिशा
पंडित प्रवीण मिश्र के अनुसार, वास्तु शास्त्र में कामधेनु गाय की मूर्ति को घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में रखना सबसे उत्तम और शुभ माना गया है। यह दिशा देवी-देवताओं की मानी जाती है और सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य केंद्र होती है। मान्यता है कि इस दिशा में कामधेनु गाय की मूर्ति रखने से धन की आवक बढ़ती है और सुख-समृद्धि का संचार होता है। हालांकि, यह भी ध्यान रखें कि मूर्ति स्थापित करने के बाद उस स्थान की नियमित साफ-सफाई करना और प्रतिदिन पूजा करना भी आवश्यक माना गया है।
चिंताओं को दूर करने के लिए विशेष उपाय
जिन लोगों को संतान प्राप्ति में लगातार बाधा आ रही हो या संतान संबंधी कोई चिंता बनी रहती हो, उनके लिए कामधेनु गाय की मूर्ति विशेष फलदायी साबित हो सकती है। वास्तु के अनुसार, ऐसे लोगों को अपने घर में बछड़े सहित सफेद रंग की कामधेनु गाय की मूर्ति स्थापित करनी चाहिए। ऐसी मूर्ति को बेहद शुभ माना जाता है। इसकी नियमित पूजा और श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करने से योग्य और संस्कारी संतान का आशीर्वाद मिलने की धार्मिक मान्यता है।
सफलता और यश प्राप्ति का मार्ग
जो लोग अपने जीवन में आर्थिक उन्नति, करियर में मनचाही सफलता और समाज में मान-सम्मान व यश की कामना रखते हैं, उन्हें भी अपने घर या दफ्तर में कामधेनु गाय की मूर्ति अवश्य रखनी चाहिए। नियमित पूजा-अर्चना और श्रद्धा के साथ प्रार्थना करने से धन-संपदा और उन्नति के मार्ग खुलने की मान्यता बताई गई है। इसके अलावा, धन-धान्य की निरंतर प्राप्ति के लिए कामधेनु गाय की प्रतिमा को तिजोरी, गल्ले या धन रखने के स्थान के पास रखना भी बेहद अच्छा माना जाता है।
कामधेनु गाय को घर या दुकान में स्थापित करने के बाद रोजाना उनकी आरती अवश्य करनी चाहिए। विशेष पर्वों, व्रतों और त्योहारों पर मूर्ति का गंगाजल से अभिषेक कर उन्हें ताजे पुष्प अर्पित करें। इसके साथ ही अपनी मनोकामनाएं पूरी श्रद्धा के साथ गौ माता के सम्मुख कहें। घर में मूर्ति पूजन के साथ-साथ समय-समय पर वास्तविक गौशाला जाकर गायों को हरा चारा खिलाने और उनकी सेवा करने से भी अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।





















