इंदौर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद धार शहर छावनी में तब्दील; सुरक्षा के लिए 2,000 से अधिक जवान तैनात
धार (मध्य प्रदेश) : मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर इंदौर उच्च न्यायालय (High Court) के फैसले के बाद आज पहला शुक्रवार है। पिछले 23 वर्षों में यह पहला ऐसा मौका है, जब शुक्रवार के दिन भोजशाला परिसर के भीतर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। कोर्ट के आदेश के बाद आज जहां हिंदू समाज की ओर से परिसर में भव्य ‘महाआरती’ का आयोजन किया जा रहा है, वहीं मुस्लिम समाज ने इसके विरोध में अपने-अपने घरों के आंगन में ही शांतिपूर्ण तरीके से नमाज अदा करने का निर्णय लिया है। ऐतिहासिक मोड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस बेहद सतर्क है। पूरे धार शहर और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
दोपहर 1 बजे महाआरती, गर्भगृह को भव्य रूप से सजाया गया
भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा ने बताया कि उच्च न्यायालय के फैसले के बाद श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग दर्शन और पूजन के लिए भोजशाला पहुंच रहे हैं। गर्भगृह के आसपास खूबसूरत रंगोली सजाई गई है और पूरे परिसर को आकर्षक ढंग से आलोकित किया गया है। दोपहर ठीक 1:00 बजे परिसर में महाआरती का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
मुस्लिम समाज का शांतिपूर्ण विरोध: काली पट्टी बांधेंगे, बाजार रहेंगे बंद
दूसरी ओर, मुस्लिम समाज ने अदालत के फैसले के खिलाफ कानून के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण विरोध जताने का एलान किया है। मुस्लिम समाज के सदर अब्दुल समद ने स्पष्ट किया: समाज के लोग संविधान और कानून का सम्मान करते हुए किसी सार्वजनिक स्थान पर नमाज नहीं पढ़ेंगे और न ही किसी की आस्था को ठेस पहुंचाएंगे। हम अपने घरों के आंगन में ही जुमे की नमाज अदा करेंगे। विरोध स्वरूप समाज के लोग काली पट्टी बांधेंगे और अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान व बाजार बंद रखेंगे। सदर ने प्रशासन द्वारा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए गए कदमों का स्वागत किया और सभी समुदायों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।
अभेद्य किले में तब्दील हुआ धार, फ्लैग मार्च और सोशल मीडिया पर नजर
सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए प्रशासन ने भोजशाला सहित पूरे शहर में 2,000 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेने के लिए शहर के मुख्य मार्गों पर फ्लैग मार्च निकाला। धार के पुलिस अधीक्षक (SP) सचिन शर्मा ने बताया कि पूरे शहर में शांति का माहौल है। संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी और ड्रोन के जरिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही सोशल मीडिया सेल को एक्टिव कर दिया गया है ताकि किसी भी भ्रामक, भड़काऊ या आपत्तिजनक पोस्ट पर तत्काल कानूनी कार्रवाई की जा सके।
क्या था इंदौर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला?
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने विगत शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए भोजशाला को ‘देवी सरस्वती का मंदिर’ करार दिया था। इसके साथ ही अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के उस पुराने आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत हिंदुओं को केवल मंगलवार को पूजा और मुस्लिमों को शुक्रवार को नमाज की अनुमति थी। कोर्ट के आदेश के बाद एएसआई ने हिंदुओं को स्मारक में निर्बाध (नियमित) प्रवेश और पूजा-अर्चना की अनुमति दे दी है।
विवाद की पृष्ठभूमि
- 11वीं सदी का स्मारक: इस ऐतिहासिक इमारत को लेकर विवाद सदियों पुराना है। मुस्लिम पक्ष इसे ‘कमाल मौला मस्जिद’ बताता आया है।
- हिंदू पक्ष का दावा: हिंदू पक्षकारों का स्पष्ट कहना है कि यह परमार वंश के राजा भोज द्वारा निर्मित मां सरस्वती का मंदिर (भोजशाला) है, जिसे अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के दौरान ध्वस्त कर दिया गया था।
- सुप्रीम कोर्ट जाएगा मुस्लिम पक्ष: हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद बीते मंगलवार को भी हिंदुओं ने यहां हनुमान चालीसा का पाठ कर और पटाखे फोड़कर जश्न मनाया था। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में चुनौती देने की घोषणा की है।























