नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे वकील
लखनऊ, संवाददाता : राजधानी लखनऊ के कैसरबाग स्थित सिविल कोर्ट परिसर के बाहर रविवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान जमकर हंगामा हो गया। नगर निगम द्वारा चलाए गए ध्वस्तीकरण अभियान का विरोध कर रहे वकीलों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद हालात बेकाबू हो गए।
प्रदर्शन कर रहे वकीलों को हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इस दौरान अफरातफरी मच गई और कुछ लोगों ने पुलिस व नगर निगम की टीम पर पथराव कर दिया। घटना में तीन अधिवक्ता और एक पुलिसकर्मी घायल हो गए। सभी घायलों को इलाज के लिए बलरामपुर अस्पताल भेजा गया, जहां एक वकील अनिल कुमार को भर्ती कराया गया है।
जानकारी के मुताबिक, हाई कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने सिविल कोर्ट के बाहर बने 240 अवैध निर्माणों को चिन्हित किया था। इनमें ज्यादातर वकीलों के चैंबर और दुकानें शामिल थीं। रविवार को नगर निगम की टीम 10 बुलडोजर और करीब 300 पुलिसकर्मियों के साथ अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। कार्रवाई शुरू होते ही वकील विरोध में उतर आए और बुलडोजरों के सामने खड़े हो गए। पुलिस ने उन्हें हटाने की कोशिश की, लेकिन विवाद बढ़ गया। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया।
बताया जा रहा है कि जनवरी 2026 में कोर्ट परिसर के बाहर अवैध कब्जों को लेकर कई शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। अधिवक्ता सुनीता सिंह समेत अन्य लोगों ने इस मामले में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। 7 मई को हाई कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। इसके बाद नगर निगम ने 12 मई को अवैध निर्माणों पर लाल निशान लगाकर 16 मई तक जगह खाली करने का नोटिस जारी किया था। निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद रविवार को ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया गया। अधिवक्ता शुभम यादव ने आरोप लगाया कि पुलिस और नगर निगम कर्मचारियों ने वकीलों पर लाठीचार्ज किया और जबरन चैंबर तोड़े गए। वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश के तहत की गई।























