पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और कार्यकारी अध्यक्षों से राय लेगा आलाकमान, सतीशन-वेणुगोपाल-चेन्निथला के बीच मुकाबला
तिरुवनंतपुरम: केरल में मुख्यमंत्री पद के चयन को लेकर जारी असमंजस के बीच कांग्रेस आलाकमान ने फैसला लेने से पहले वरिष्ठ नेताओं से व्यापक चर्चा करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के पूर्व अध्यक्षों और कार्यकारी अध्यक्षों की राय ली जाएगी। दिल्ली बुलाए गए नेताओं में वी. एम. सुधीरन, मुल्लापल्ली रामचंद्रन, के. मुरलीधरन, के. सुधाकरन और एम. एम. हसन शामिल हैं। इसके अलावा वरिष्ठ विधायक तिरुवंचूर राधाकृष्णन तथा कार्यकारी अध्यक्ष पी. सी. विष्णुनाथ, शफी परम्बिल और ए. पी. अनिल कुमार को भी राजधानी पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व जल्द ही मुख्यमंत्री पद को लेकर अंतिम फैसला कर सकता है। इस दौड़ में वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला, निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीशन और एआईसीसी संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। पार्टी पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक द्वारा विधायकों से राय लेने और दावेदारों के साथ लंबी बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बनने पर केंद्रीय नेतृत्व ने परामर्श का दायरा बढ़ाया है।
सतीशन खेमे को IUML समर्थन से बढ़त की उम्मीद
पूर्व प्रदेश अध्यक्षों से राय लेने के फैसले से वी. डी. सतीशन समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है। सतीशन को जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ सहयोगी दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का भी समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, वी. एम. सुधीरन और के. मुरलीधरन जैसे वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि मुख्यमंत्री चयन में जनभावनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सतीशन समर्थकों का दावा है कि IUML का रुख भी इसी जनमत को दर्शाता है। उनका यह भी कहना है कि यदि के. सी. वेणुगोपाल को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो दो उपचुनाव कराने पड़ सकते हैं—एक विधानसभा सीट के लिए और दूसरा अलाप्पुझा लोकसभा सीट के लिए, जिसका प्रतिनिधित्व फिलहाल वेणुगोपाल कर रहे हैं।
वेणुगोपाल और चेन्निथला खेमे भी सक्रिय
दूसरी ओर, वेणुगोपाल समर्थकों का दावा है कि उन्हें अधिकांश विधायकों और सांसदों का समर्थन हासिल है। उनके समर्थकों का कहना है कि वे चुनावी रणनीति बनाने में बेहद सक्षम हैं और संगठनात्मक अनुभव रखते हैं। वहीं, रमेश चेन्निथला खेमे का तर्क है कि वह सबसे वरिष्ठ नेता हैं और हर परिस्थिति में पार्टी तथा नेहरू-गांधी परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि एनएसयूआई और युवा कांग्रेस में उनके नेतृत्व के दौरान काम करने वाले कई नेता आज मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री बन चुके हैं।
भाजपा ने साधा निशाना
मुख्यमंत्री चयन में हो रही देरी को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर हमला बोला है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि कांग्रेस आलाकमान मुस्लिम लीग और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों के दबाव के कारण फैसला नहीं ले पा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, वह पद संभालते ही मुस्लिम लीग नेतृत्व के सामने हाजिरी लगाएगा।
























