सुलतानपुर, प्रतापगढ़ और प्रयागराज के बाजारों में छाए स्थानीय आम; बेहतर दाम से किसानों को हो रहा लाभ
अमेठी,संवाददाता : आम को फलों का राजा कहा जाता है और इस बार क्षेत्र के बागों में तैयार हो रहे आम इसकी प्रतिष्ठा को और मजबूत कर रहे हैं। सुलतानपुर, प्रतापगढ़ व प्रयागराज के बाजारों में यहां के आमों की जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है। स्थानीय किसानों को अन्य बाजारों की तुलना में 15 से 20 रुपये प्रति किलो अधिक मूल्य मिल रहा है, जिससे वे अपनी उपज शहर की मंडियों में भेज रहे हैं।

क्षेत्र में मियां जाकी, रेड आईबेरी, रेड पालमार, इंडोपालमार, टॉमी एटकिंसन, सेंसेशन, हनीड्यू, आर2ई2, अमेरिकन केंट, महा चनोक, कातिमान, बनाना सहित 20 से अधिक प्रजातियों के आम तैयार हो रहे हैं। जिले में लगभग 1300 हेक्टेयर में आम की खेती की जा रही है, जो किसानों की आय का प्रमुख स्रोत बनती जा रही है।
किसानों की सफलता की कहानी:
घोरहा गांव के किसान धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने 22 बिस्वा भूमि में 132 आम के पेड़ लगाए हैं, जिनमें 20 से अधिक प्रजातियां शामिल हैं। उनके बाग में मुसम्मी और सेब के पेड़ भी हैं। इस वर्ष अच्छी पैदावार की उम्मीद है। उनके आम लखनऊ, रायबरेली और प्रतापगढ़ सहित कई शहरों में भेजे जाते हैं।

धर्मेंद्र बताते हैं कि एक पेड़ लगाने में लगभग 300 रुपये का खर्च आता है, जबकि पौधे जुलाई माह से 500 से 1500 रुपये तक में उपलब्ध होते हैं। पिछले वर्ष उन्होंने एक टन आम की आपूर्ति की थी। स्थानीय बाजार में आम का भाव 25 से 40 रुपये प्रति पीस है, जबकि बाहर यही आम 50 से 60 रुपये प्रति पीस बिकता है। भाड़ा घटाने के बाद भी उन्हें प्रति पीस 10 से 15 रुपये का अतिरिक्त लाभ होता है। मगरा, बनबीरपुर, तिवारीपुर और कंजास गांवों में भी आम की बागवानी तेजी से बढ़ रही है और किसान अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
सरकारी सहायता और अनुदान:
उद्यान विभाग द्वारा आम की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को अनुदान दिया जा रहा है। इच्छुक किसान पंजीकरण कराकर इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
घोरहा गांव में सेब की खेती भी सफल:
घोरहा गांव में अन्ना माइकल और डोरसेट गोल्डन जैसी सेब की प्रजातियां भी उगाई जा रही हैं, जो गर्म जलवायु में भी अच्छी पैदावार देती हैं। एक सेब का पेड़ प्रति वर्ष लगभग 75 किलोग्राम फल देता है और पौधा 2 से 2.5 वर्ष में फल देना शुरू कर देता है। ये फल स्वाद में मीठे-खट्टे, कुरकुरे और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं।
बढ़ता रुझान, बढ़ती आय:
भादर क्षेत्र के किसान अब पारंपरिक खेती से हटकर आम की बागवानी की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। आढ़तियों के माध्यम से विभिन्न जिलों में आपूर्ति कर उन्हें अच्छा मुनाफा मिल रहा है। उद्यान निरीक्षक प्रमोद कुमार यादव के अनुसार, आम की बागवानी किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही है और विभाग इसके विस्तार के लिए हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।





















