टीएमसी का किला ढहा, ममता बनर्जी को सत्ता से बाहर होना तय
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। 15 साल तक सत्ता में रहने के बाद ममता बनर्जी को अब अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ सकती है। भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस के मजबूत किले को भेदते हुए पहली बार राज्य में सत्ता की दहलीज पर कदम रखा है।
200 के पार बीजेपी, टीएमसी 81 पर सिमटी
2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 293 में से 206 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं टीएमसी 81 सीटों तक सिमट गई। यह नतीजा सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं, बल्कि लंबे समय से जारी राजनीतिक मेहनत का परिणाम माना जा रहा है।
2014 के बाद बदली तस्वीर
एक समय था जब बंगाल में बीजेपी की मौजूदगी बेहद सीमित थी। लेकिन 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पार्टी ने राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की। 2016 में बीजेपी सिर्फ 3 सीटों पर सिमटी थी, 2021 में यह आंकड़ा 77 तक पहुंचा और अब 2026 में पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ली।
अमित शाह का पुराना बयान फिर चर्चा में
दिसंबर 2014 में कोलकाता के धर्मतला में हुई एक रैली में अमित शाह ने कहा था कि वह “बीजेपी का एक छोटा कार्यकर्ता” हैं और बंगाल से टीएमसी को उखाड़ने आए हैं। उस समय इसे एक सामान्य राजनीतिक बयान माना गया था, लेकिन 12 साल बाद यह बयान हकीकत बनता नजर आ रहा है।
पहले कमजोर, अब मजबूत बीजेपी
80 और 90 के दशक में बीजेपी का वोट शेयर बेहद कम था—कभी 1% से भी नीचे। कई चुनाव ऐसे भी रहे जब पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। 2006 और 2011 तक भी स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। असल बदलाव 2016 के बाद देखने को मिला, जब वोट प्रतिशत सीटों में बदलने लगा और पार्टी ने धीरे-धीरे अपनी स्थिति मजबूत कर ली।
कैसे फतेह हुआ टीएमसी का किला?
बीजेपी की इस जीत के पीछे सबसे बड़ा कारण उसका जमीनी स्तर पर लगातार काम करना रहा। संगठन को मजबूत करना, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना और घर-घर पहुंच बनाना इसकी रणनीति का हिस्सा रहा। वहीं दूसरी ओर, 15 साल सत्ता में रहने के बाद टीएमसी के प्रति जनता का मोहभंग भी एक अहम कारण माना जा रहा है।
























