गठबंधन में रहने का दावा, लेकिन लगातार रैलियों से बड़े सियासी संकेत
आजमगढ़ : पूर्वांचल की राजनीति में Om Prakash Rajbhar एक बार फिर सुर्खियों में हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi के संसदीय क्षेत्र Varanasi में आयोजित सामाजिक समरसता रैली में भारी भीड़ जुटाकर उन्होंने अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया है। इस रैली ने सहयोगी दल Bharatiya Janata Party समेत पूरे पूर्वांचल की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
राजनीतिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि लगातार रैलियों और शक्ति प्रदर्शन के जरिए राजभर क्या कोई बड़ा संदेश देना चाह रहे हैं या आगामी चुनावों से पहले अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। हालांकि, एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ किया कि फिलहाल अकेले चुनाव लड़ने का उनका कोई इरादा नहीं है और वे गठबंधन के साथ ही आगे बढ़ना चाहते हैं।राजभर का यह रुख Sanjay Nishad की रणनीति से मिलता-जुलता माना जा रहा है, जिन्होंने पहले ही भाजपा को “बड़ा भाई” बताते हुए गठबंधन पर भरोसा जताया था।
अतरौलिया सीट पर नजर कायम
आजमगढ़ की Atraulia सीट को लेकर भी राजभर के संकेत साफ हैं। उन्होंने इसे “घर का मामला” बताते हुए सहयोगी दलों के साथ मिलकर समाधान निकालने की बात कही। इससे साफ है कि यह सीट उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
सपा पर निशाना, विकास कार्यों का जिक्र
राजभर ने Samajwadi Party और उसके नेता Akhilesh Yadav पर निशाना साधते हुए आजमगढ़ क्षेत्र में अपने विकास कार्यों को गिनाया। उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि इलाके में उनकी पकड़ अब भी मजबूत है।
वाराणसी रैली के मायने
वाराणसी में बड़े पैमाने पर रैली आयोजित करने के पीछे के सवाल पर राजभर ने कहा कि उनका उद्देश्य प्रधानमंत्री मोदी के विकास कार्यों पर जनता के भरोसे को और मजबूत करना है। उन्होंने इसे सामाजिक समरसता का संदेश और जनसमर्थन का प्रदर्शन बताया।
विपक्ष को भी संदेश
राजभर ने कहा कि जनता का विश्वास जीतने के लिए केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम जरूरी है। उनकी यह रैली विपक्षी दलों के लिए भी एक राजनीतिक संदेश के रूप में देखी जा रही है।
पूर्वांचल में बदलते समीकरण
विश्लेषकों का मानना है कि राजभर की सक्रियता, लगातार रैलियां और सीटों को लेकर रणनीति इस बात के संकेत हैं कि पूर्वांचल की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। फिलहाल वे गठबंधन में बने रहने की बात कर रहे हैं, लेकिन उनकी गतिविधियां भविष्य में बड़े राजनीतिक बदलाव की ओर इशारा कर रही हैं।






















