लाइसेंस के बिना कारोबार, खराब खाद्य गुणवत्ता और गंदगी से लोगों की सेहत पर मंडरा रहा खतरा
सुल्तानपुर : सुल्तानपुर जिले में खाद्य सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी का मामला गंभीर होता जा रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बड़ी संख्या में होटल और ढाबे बिना वैध लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन के संचालित हो रहे हैं, जिससे आम लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
स्थानीय स्तर पर हुई जांच में सामने आया है कि अधिकांश प्रतिष्ठानों के पास भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) का अनिवार्य 14 अंकों का लाइसेंस नंबर तक नहीं है। कई जगहों पर लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बावजूद भी कारोबार धड़ल्ले से जारी है। नियमों के अनुसार प्रत्येक खाद्य व्यवसायी को अपने प्रतिष्ठान पर लाइसेंस नंबर प्रदर्शित करना अनिवार्य है, लेकिन अधिकांश स्थानों पर यह व्यवस्था नदारद है।खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 31 के तहत बिना लाइसेंस कारोबार करना दंडनीय अपराध है, जिसमें पांच लाख रुपये तक जुर्माना और छह माह तक की सजा का प्रावधान है। इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन लगातार जारी है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कई होटलों में खाद्य सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब है। कच्चे माल की खरीद का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा, जिससे सिंथेटिक दूध, केमिकल से पके फल और बासी तेल के उपयोग की आशंका बढ़ जाती है। यह स्थिति उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उपभोक्ताओं के सामने एक बड़ी समस्या यह भी है कि बिना लाइसेंस वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ शिकायत दर्ज करना मुश्किल हो जाता है। ‘फूड सेफ्टी कनेक्ट’ ऐप या हेल्पलाइन 14445 पर शिकायत करने के लिए लाइसेंस नंबर जरूरी होता है, जिससे फूड पॉइजनिंग जैसे मामलों में जिम्मेदारी तय करना कठिन हो जाता है। सफाई व्यवस्था की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। कई होटलों के किचन में स्वच्छता के न्यूनतम मानकों का पालन नहीं हो रहा है। एग्जॉस्ट सिस्टम, वॉश बेसिन और डस्टबिन जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। खुले में खाना बनाना और गंदगी के बीच खाद्य सामग्री तैयार करना आम बात बन गई है।
जिले में करीब 400 से अधिक होटल और ढाबे संचालित हो रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। विशेष अभियानों में भी गिने-चुने प्रतिष्ठानों पर ही कार्रवाई होती है, जबकि अधिकांश को नजरअंदाज कर दिया जाता है। वहीं, नियमों का पालन करने वाले व्यापारियों का कहना है कि वे लाइसेंस और टैक्स का नियमित भुगतान कर रहे हैं, लेकिन बिना लाइसेंस संचालित होटल सस्ते दाम पर भोजन बेचकर अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और बिना लाइसेंस चल रहे होटल-ढाबों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को सुरक्षित और शुद्ध भोजन उपलब्ध हो सके।
























