दोनों वक्त खिला रहीं ताजा भोजन
नई दिल्ली, संवाददाता : दक्षिणी दिल्ली के मालवीय नगर स्थित ‘होटल फ्लोरिश स्टे’ में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस दर्दनाक हादसे में 22 मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा गईं, जबकि कई लोग जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। इस त्रासदी ने कई हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया—किसी के घर का इकलौता कमाने वाला चला गया, तो किसी का पूरा परिवार ही खत्म हो गया। इस असीम दुख और बेबसी के बीच, मालवीय नगर की गलियों से इंसानियत की एक बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है।
मसीहा बनकर उभरीं नफीसा
हादसे के बाद जहां चारों तरफ चीख-पुकार और मातम का माहौल था, वहीं दिल्ली की रहने वाली नफीसा नाम की महिला इन बेसहारा और टूट चुके लोगों की मदद के लिए आगे आईं। नफीसा पिछले कई दिनों से बिना थके, बिना रुके इस भीषण अग्निकांड के पीड़ितों, उनके तीमारदारों (परिजनों) और राहत कार्य में जुटे बचाव कर्मियों की सेवा में जुटी हुई हैं।
दोनों समय का ताजा भोजन और हौसला
नफीसा और उनकी टीम अस्पताल के बाहर और प्रभावित इलाके में जरूरतमंदों को दोनों समय का शुद्ध और ताजा भोजन मुहैया करा रही हैं। हादसे में घायल हुए लोगों के परिजन, जो अपनों की जान बचाने की फिक्र में भूखे-प्यासे अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं, उनके लिए नफीसा की यह रसोई किसी वरदान से कम नहीं है। दिन-रात राहत और मलबे को हटाने के काम में जुटे प्रशासनिक और बचाव कर्मियों तक भी वह सम्मानपूर्वक भोजन पहुंचा रही हैं।
“यह राजनीति का नहीं, इंसानियत का वक्त है”
हादसे में कइयों के आशियाने और सहारे छिन जाने के बाद, नफीसा का यह प्रयास सिर्फ पेट भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन पीड़ितों को यह अहसास करा रहा है कि इस संकट की घड़ी में वे अकेले नहीं हैं। स्थानीय लोग नफीसा के इस जज्बे को सलाम कर रहे हैं। आपदा के इस दौर में जहां कई बार व्यवस्थाएं छोटी पड़ जाती हैं, वहां नफीसा जैसी आम नागरिक समाज में इंसानियत और कौमी एकता की एक बेहतरीन मिसाल पेश कर रही हैं।
मालवीय नगर के होटल फ्लोरिश स्टे में लगी भीषण आग में 22 लोगों की मौत हो चुकी है। फिलहाल पुलिस और दमकल विभाग हादसे के कारणों की जांच कर रहे हैं, लेकिन इस संकट काल में नफीसा की ‘नेकी की रसोई’ पीड़ितों के जख्मों पर मरहम लगाने का काम कर रही है।






















