टीएमसी-बीजेपी में आरोप-प्रत्यारोप तेज, 3.21 करोड़ मतदाता करेंगे फैसला
कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे और अंतिम चरण के लिए सोमवार शाम प्रचार थम गया। इस दौरान सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress और विपक्षी Bharatiya Janata Party के बीच मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर), घुसपैठ, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जमकर जुबानी जंग देखने को मिली।
दूसरे चरण में 29 अप्रैल को राज्य की 142 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। इस चरण में कुल 3,21,73,837 मतदाता वोट डालेंगे, जिनमें 1,64,35,627 पुरुष, 1,57,37,418 महिलाएं और 792 तृतीय-लिंग के मतदाता शामिल हैं। इससे पहले 23 अप्रैल को हुए पहले चरण में 152 सीटों पर 93.19 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया था। चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah, रक्षा मंत्री Rajnath Singh, असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस सरकार को कानून-व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक हिंसा और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर घेरा। प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य में “जंगलराज” का आरोप लगाते हुए महिलाओं की सुरक्षा और औद्योगिक विकास में विफलता का मुद्दा उठाया। उन्होंने Citizenship Amendment Act (सीएए) के तहत मतुआ समुदाय को नागरिकता देने का वादा भी दोहराया और “विकसित बंगाल” का विजन पेश किया।
वहीं, मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने भाजपा पर विभाजनकारी राजनीति करने और लोगों के खानपान व सामाजिक ताने-बाने में दखल देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी पहले चरण में ही 100 सीटों का आंकड़ा पार कर चुकी है और दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी। तृणमूल के वरिष्ठ नेता Abhishek Banerjee ने भाजपा पर अपने पुराने वादे पूरे न करने का आरोप लगाया, जबकि आम आदमी पार्टी के नेता Arvind Kejriwal और राजद नेता Tejashwi Yadav ने भी टीएमसी के समर्थन में प्रचार किया। वहीं, कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने दोनों दलों पर निशाना साधा।दूसरे चरण के मतदान के लिए 41,001 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां वेबकास्टिंग के जरिए निगरानी की जाएगी। चुनाव आयोग ने सात जिलों में केंद्रीय बलों की 2,321 कंपनियों की तैनाती के साथ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की है। साथ ही 142 सामान्य, 95 पुलिस और 100 व्यय पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं, ताकि मतदान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराया जा सके।
























