हाईकोर्ट ने अपर मुख्य सचिव से मांगा जवाब; पंचायती राज मंत्री बोले- ‘जरूरत पड़ी तो प्रशासक बनेंगे वर्तमान प्रतिनिधि’
लखनऊ,संवाददाता : उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों से पहले पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC Commission) के गठन में हो रही देरी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने इस मामले में पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव अनिल कुमार से जवाब तलब किया है। इस कानूनी सख्ती के बीच सरकार ने संकेत दिए हैं कि चुनाव टलने की स्थिति में वर्तमान निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है।
न्यायालय की फटकार: 19 मई को अगली सुनवाई
न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की एकल पीठ ने अधिवक्ता मोतीलाल यादव की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
- अवमानना का आधार: सरकार ने 4 फरवरी 2026 को कोर्ट को आश्वासन दिया था कि चुनाव से पहले आयोग का गठन कर लिया जाएगा और इसकी रिपोर्ट के आधार पर ही ओबीसी आरक्षण लागू होगा।
- अदालत का रुख: समय सीमा बीतने के बाद भी आयोग का गठन न होने को कोर्ट ने आदेश की अवहेलना माना है। अब इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 19 मई को होगी।
मंत्री ओम प्रकाश राजभर का बड़ा बयान
चुनावों को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि तकनीकी कारणों से चुनाव समय पर नहीं हो पाते हैं, तो सरकार वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रही है।
“अगर समय पर चुनाव नहीं होते हैं, तो ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों को ही प्रशासक बनाकर उनका कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी ऐसी व्यवस्था अपनाई गई है।”
कार्यकाल विस्तार की मांग और नारेबाजी
पंचायती राज निदेशालय में आयोजित एक कार्यशाला के दौरान ब्लॉक प्रमुखों ने चुनाव टलने की स्थिति में कार्यकाल बढ़ाने की मांग को लेकर नारेबाजी की। ब्लॉक प्रमुख संघ के पदाधिकारियों ने मांग उठाई है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को ही पदेन प्रशासक नियुक्त किया जाए ताकि ग्रामीण विकास के कार्य प्रभावित न हों।
चुनाव टलने के मुख्य कारण
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि 26 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, लेकिन चुनाव कराना फिलहाल चुनौतीपूर्ण है। इसके पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
- समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन न होना: बिना आयोग की रिपोर्ट के आरक्षण प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकती।
- मतदाता सूची: अभी तक मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य भी पूर्ण नहीं हो पाया है।























