पुतला दहन के दौरान घायल हुई थीं अनुपमा जायसवाल; अखिलेश बोले- ‘मेरा पैगाम मोहब्बत है, जहाँ तक पहुँचे’
लखनऊ,संवाददाता : राजनीति के मैदान में भले ही तलवारें खिंची हों, लेकिन मानवीय संवेदनाओं के मामले में उत्तर प्रदेश की राजनीति ने मंगलवार को एक सुखद तस्वीर पेश की। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अचानक लखनऊ के मेदांता अस्पताल पहुँचे और वहाँ भर्ती बहराइच से भाजपा विधायक व पूर्व मंत्री अनुपमा जायसवाल का हाल-चाल जाना।
मुलाकात की भावुक तस्वीर और शायराना संदेश
अस्पताल के बेड पर स्वास्थ्य लाभ ले रहीं अनुपमा जायसवाल से मिलकर अखिलेश यादव ने हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। इस दौरान दोनों के बीच कुछ देर बातचीत हुई और विधायक के चेहरे पर मुस्कान भी दिखी। अखिलेश यादव ने डॉक्टरों से उनके इलाज की जानकारी ली और शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए अखिलेश ने एक मशहूर शेर लिखा: उनका जो फर्ज है, वो अहल-ए-सियासत जानें मेरा पैगाम मोहब्बत है, जहाँ तक पहुँचे।
कैसे झुलस गई थीं विधायक?
घटना 25 अप्रैल 2026 की है, जब बहराइच में भाजपा कार्यकर्ता ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के समर्थन में प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान अखिलेश यादव और राहुल गांधी के पुतले फूंके जा रहे थे। पुतले में आग लगाते समय अचानक लपटें तेज हो गईं और हवा के झोंके के कारण आग विधायक अनुपमा जायसवाल के चेहरे तक पहुँच गई। इससे उनका चेहरा झुलस गया और बाल भी जल गए। बहराइच जिला अस्पताल से उन्हें बेहतर इलाज के लिए लखनऊ रेफर किया गया था।
सपा का भाजपा पर कटाक्ष: ‘मानवता बनाम सत्ता’
मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि वे समाज में आग नहीं, बल्कि सौहार्द की फुहार चाहते हैं। वहीं, सपा मीडिया सेल ने इस मौके पर सत्ता पक्ष को घेरते हुए कहा:
- तंज: सपा प्रमुख उस विधायक से मिलने पहुँचे जो उन्हीं का पुतला फूंकते वक्त घायल हुई थीं।
- कटाक्ष: जहाँ अपनी पार्टी की महिला विधायक अस्पताल में है, वहीं भाजपा के बड़े नेता बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं और अपनों की सुध लेने नहीं आए।
सियासी महत्व: प्रतिद्वंद्विता से ऊपर शिष्टाचार
वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह कदम ‘राजनीति में स्वस्थ परंपरा’ का उदाहरण है। गौरतलब है कि अनुपमा जायसवाल ने 2022 के चुनाव में बहराइच सदर सीट से अखिलेश के करीबी यासर शाह को कड़े मुकाबले में करीब 4 हजार वोटों से हराया था। चुनावी प्रतिद्वंद्विता के बावजूद अस्पताल पहुँचकर अखिलेश ने यह संदेश दिया है कि वैचारिक मतभेद निजी दुश्मनी नहीं होने चाहिए।























