झड़प में कई छात्र घायल, एक के सिर पर गंभीर चोट
लखनऊ, संवाददाता : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सड़कें आज एक बार फिर युवाओं के आक्रोश का गवाह बनीं। नीट (NEET) और देश-प्रदेश में लगातार हो रहे पेपर लीक घोटालों के खिलाफ छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) ने लखनऊ में एक जोरदार और आक्रामक प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यालय से शुरू हुआ यह मार्च उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब राजभवन का घेराव करने जा रहे छात्रों को रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई इस तीखी झड़प में कई लोग घायल हुए और कुछ छात्र बेहोश भी हो गए।
चार लेयर की बैरिकेडिंग तोड़ आगे बढ़े कार्यकर्ता
यह प्रदर्शन एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और प्रदेश अध्यक्ष अनस रहमान के नेतृत्व में आयोजित किया गया था, जिसमें सैकड़ों की संख्या में छात्र और कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारी जैसे ही राजभवन की तरफ बढ़े, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए पहले से तैयार की गई 4-लेयर की भारी-भरकम बैरिकेडिंग लगा दी। हालाँकि, आक्रोशित कार्यकर्ता यहीं नहीं थमे। छात्र हाथों में संगठन के झंडे लेकर बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और सरकार विरोधी नारेबाजी करने लगे। पुलिस ने जब प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेलने की कोशिश की, तो दोनों पक्षों के बीच जोरदार झड़प शुरू हो गई। इसी धक्का-मुक्की और लाठीचार्ज के दौरान एक कार्यकर्ता के सिर पर गंभीर चोट आई और वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़ा, जिसे उसके साथी आनन-फानन में अस्पताल लेकर भागे।
“सरकार पुलिस के दम पर छात्रों की आवाज दबा रही है” प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया। वहीं लखनऊ यूनिवर्सिटी के एनएसयूआई अध्यक्ष राणा सुधांशु शर्मा और कांग्रेस प्रवक्ता सचिन ने भी पुलिस पर बदसलूकी और ‘जानवरों जैसा व्यवहार’ करने के गंभीर आरोप मढ़े।
एनएसयूआई की सरकार से तीन प्रमुख मांगें:
संगठन ने इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए तीन मुख्य मांगें सामने रखी हैं: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस महाघोटाले की नैतिक जिम्मेदारी लें और तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर अविलंब पूरी तरह से पाबंदी लगाई जाए। पेपर लीक के सदमे के कारण जिन होनहार छात्रों ने आत्महत्या की या दम तोड़ दिया, उनके पीड़ित परिवारों को ₹5 करोड़ का मुआवजा और घर के अन्य बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाए।
प्रदर्शन से पहले कई नेता किए गए ‘हाउस अरेस्ट’
इस आंदोलन का असर सिर्फ लखनऊ तक ही सीमित नहीं था। सुदूर जिलों जैसे अमेठी में भी यूथ कांग्रेस के जिलाध्यक्ष शुभम सिंह समेत प्रदेश के कई अन्य पदाधिकारियों को प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए रात में ही हाउस अरेस्ट (नजरबंद) कर लिया गया था। एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष अनस रहमान ने सरकार को चेतावनी देते हुए साफ कर दिया कि वे सभी राहुल गांधी के सिपाही हैं और लाठी-जेल के दम पर युवाओं और बेरोजगारों के हक की यह लड़ाई अब थमने वाली नहीं है।























