महमूदाबाद तहसील में कैसे हुआ यह बड़ा ‘कागजी खेल
महमूदाबाद/सीतापुर, संवाददाता : जिले के गांजरी इलाके की कुछ अलग ही तस्वीर है। यहां कागजों के खेल से किसान और आमजन बेहद परेशान हैं। कुछ ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला महमूदाबाद तहसील क्षेत्र के बाढ़ और कटान प्रभावित क्षेत्र के दुर्गापुर गांव से सामने आया है, जहां एक जीवित किसान को सरकारी अभिलेखों में ‘मुर्दा’ घोषित कर दिया गया है। तहसील प्रशासन के चक्कर काट-काटकर थक चुके पीड़ित किसान ने अब परेशान होकर जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है।
दुर्गापुर (मजरा हरिहरपुर) निवासी पीड़ित किसान परसराम पुत्र पराग ने बताया कि उनके पिता की मृत्यु के बाद उनकी करीब 28 बीघा पैतृक भूमि का बंटवारा हुआ था। बहन के विवाह के बाद भूमि को दो बराबर हिस्सों में बांटा गया। परसराम के हिस्से में लगभग 14 बीघा भूमि आई, जिस पर उनका वास्तविक अधिकार है। आरोप है कि इस बंटवारे को सरकारी अभिलेखों में दर्ज करते समय प्रशासनिक कर्मियों ने बड़ी लापरवाही की और परसराम को ही मृत घोषित कर दिया। कागजों में मृत दर्ज होने के कारण वह अपनी ही भूमि का कोई लाभ नहीं ले पा रहे हैं। पीड़ित ने एसडीएम और तहसीलदार से कई बार शिकायत की, लेकिन उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
राजस्व निरीक्षक और एसडीएम ने दी सफाई
इस पूरे गंभीर मामले पर तहसील प्रशासन और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने अपनी सफाई पेश की है। राजस्व निरीक्षक वीरेंद्र सिंह का कहना है कि वरासत की प्रक्रिया लेखपाल के पोर्टल से संचालित होती है, इसलिए संभवतः गाटा संख्या चिह्नित करने में कोई तकनीकी त्रुटि हुई है। उन्होंने बताया कि दुरुस्तीकरण की कार्रवाई जारी है और जल्द ही सरकारी रिकॉर्ड को सही कर दिया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर, महमूदाबाद की एसडीएम अंजली सिंह ने मामले का संज्ञान लेते हुए कहा कि शिकायत की जांच कराई जा रही है। यदि राजस्व अभिलेखों में किसी भी प्रकार की त्रुटि या अनियमितता पाई जाती है, तो उसे नियमानुसार तुरंत ठीक कराया जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुके पीड़ित किसान को अब जिले के आला अधिकारियों और जिलाधिकारी से उम्मीद है कि उन्हें कागजों में दोबारा ‘जिंदा’ कर उनकी जमीन का हक वापस दिलाया जाएगा।






















