पप्पू यादव और राजद का सम्राट सरकार पर तीखा हमला
भागलपुर/पटना: बिहार के भागलपुर की लाइफलाइन माना जाने वाला और उत्तर व दक्षिण बिहार को जोड़ने वाला ऐतिहासिक ‘विक्रमशिला सेतु’ रविवार आधी रात के बाद एक बड़े हादसे का शिकार हो गया। लगभग 12:55 AM पर पुल का एक बड़ा हिस्सा और पिलर का स्लैब टूटकर सीधे गंगा नदी में जा गिरा। गनीमत यह रही कि हादसा आधी रात को हुआ, जिससे एक बड़ी जनहानि टल गई, अन्यथा सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी। इस घटना के बाद भागलपुर (NH-80) और नवगछिया (NH-31) के बीच सड़क संपर्क पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे कोसी और सीमांचल के 16 जिलों की रफ्तार थम गई है। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने देर रात ही घटनास्थल का मुआयना किया और सुरक्षा के मद्देनजर पुल पर आवाजाही को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।
इस हादसे ने बिहार की सियासत में जबरदस्त उबाल पैदा कर दिया है। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने राज्य सरकार, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा प्रहार किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर उन्होंने इस घटना के लिए सीधे तौर पर भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि बिहार का पथ निर्माण विभाग और पुल निर्माण निगम केवल ‘मलाई खाने’ का अड्डा बन गए हैं। पप्पू यादव ने तंज कसते हुए भाजपा को ‘भ्रष्ट जनता पार्टी’ करार दिया और आरोप लगाया कि पिछले 18-19 वर्षों से यह विभाग भाजपा के पास है, जहाँ संस्थागत भ्रष्टाचार के कारण बिहार के पुल ताश के पत्तों की तरह ढह रहे हैं।
मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। राजद का आरोप है कि स्थानीय लोग काफी समय से पुल के खंभों में कंपन और कमजोरी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने इसे लगातार नजरअंदाज किया। पार्टी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने पुल की तकनीकी मजबूती और मरम्मत पर ध्यान देने के बजाय केवल इसकी ‘रंगाई-पुताई’ कर जनता की आंखों में धूल झोंकने का काम किया है। राजद ने इसे सीधे तौर पर प्रशासनिक उदासीनता और भ्रष्टाचार का परिणाम बताया है।
विक्रमशिला सेतु का उद्घाटन साल 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी द्वारा किया गया था, और तब से यह पूरे क्षेत्र के लिए यातायात का मुख्य जरिया रहा है। पुल टूटने के बाद अब यात्रियों को वैकल्पिक मार्ग के तौर पर मुंगेर पुल का उपयोग करने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च-स्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग की है, जिसके जल्द ही भागलपुर पहुंचने की संभावना है। फिलहाल, पुल गिरने से बिहार के एक बड़े हिस्से में परिवहन संकट गहरा गया है और सरकार की ‘पुल निर्माण नीति’ एक बार फिर कटघरे में है।





















