पीड़ित परिवार ने लगाया ‘अधिकारी’ को बचाने का आरोप
गोसाईगंज : शहर के शुभांगी हॉस्पिटल में पथरी के ऑपरेशन के दौरान हुई राजेश मिश्र की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। सीएमओ द्वारा गठित चार सदस्यीय टीम की जांच में अस्पताल को दोषी पाए जाने और 24 अप्रैल को मुकदमा दर्ज होने के बाद भी अब तक अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं किया गया है। इससे आक्रोशित परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद मिली थी जांच रिपोर्ट
मृतक राजेश मिश्र के पिता राम करन मिश्र (निवासी महिलोआशापुर) ने बताया कि जिलाधिकारी के कड़े हस्तक्षेप के बाद ही सही जांच रिपोर्ट सामने आ पाई थी। लेकिन अब विभाग कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के ही एक एडिशनल सीएमओ स्तर के अधिकारी अस्पताल को संरक्षण दे रहे हैं, जिसके कारण मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कड़ी कार्रवाई करने से हिचकिचा रहे हैं।
परिजनों का अल्टीमेटम: 3 दिन में कार्रवाई नहीं तो ‘आमरण अनशन’
पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य विभाग को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि अगले तीन दिनों के भीतर शुभांगी हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन रद्द कर उसे सील नहीं किया गया, तो पूरा परिवार कलेक्ट्रेट या अस्पताल के सामने धरने पर बैठने को मजबूर होगा। महीनों से सुर्खियों में बने इस अस्पताल पर अब तक ताला न लटकना चर्चा का विषय बना हुआ है।
सीएमओ का पक्ष: “विभाग की ओर से कोई ढिलाई नहीं”
इस पूरे प्रकरण पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भारत भूषण का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग पूरी पारदर्शिता से काम कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया: “स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही अस्पताल के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कराया गया है। विभाग की ओर से किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जा रही है और नियमानुसार कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।” फिलहाल, क्षेत्र की जनता और पीड़ित परिवार की निगाहें स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या विभाग रसूखदार दबाव से हटकर पीड़ित को न्याय दिला पाएगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।























