तीन कांग्रेस और एक आरजेडी विधायक की अनुपस्थिति ने बिगाड़ा महागठबंधन का समीकरण
पटना, संवाददाता : राज्यसभा चुनाव में आरजेडी के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह की हार के बाद बिहार कांग्रेस का अंदरूनी कलह फिर से सामने आया है। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद से ही कांग्रेस के छह विधायकों में से तीन के नाराज़ होने की चर्चा थी, जिसे प्रदेश नेतृत्व लगातार खारिज करता रहा।
राहुल-खड़गे बैठक का असर नहीं
नाराज़ विधायकों को मनाने के लिए 23 जनवरी 2026 को राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक की थी। बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने मीडिया को विधायकों के पार्टी छोड़ने की खबरों को निराधार बताया था। लेकिन राज्यसभा चुनाव में इन तीन विधायकों की अनुपस्थिति ने यह साफ संकेत दे दिया कि बैठक का कोई खास असर नहीं हुआ।
राज्यसभा चुनाव में RJD को हार का सामना
बिहार राज्यसभा चुनाव में NDA के उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा ने जीत दर्ज की, जबकि RJD के अमरेंद्र धारी सिंह हार गए। RJD को जीतने के लिए 41 वोटों की जरूरत थी, जबकि महागठबंधन के पास केवल 35 वोट थे। इस कमी को पूरा करने के लिए AIMIM और BSP का समर्थन लिया गया, लेकिन कांग्रेस के तीन और RJD के एक विधायक मतदान के लिए अनुपस्थित रहे।
अनुपस्थित विधायक और उनका असर
आरजेडी ने अपने विधायकों को एक होटल में ठहराया था, लेकिन कुछ विधायक वहां नहीं पहुंचे। कांग्रेस के तीन विधायक—मनोज विश्वास, मनोहर प्रसाद सिंह और सुरेन्द्र कुशवाहा—और RJD के फैसल रहमान मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे। सुरेन्द्र कुशवाहा का पहले उपेंद्र कुशवाहा के साथ जुड़ाव बताया जाता है। ये अनुपस्थितियां महागठबंधन के लिए गंभीर झटका साबित हुईं।
अंतिम नतीजा
महागठबंधन के चारों विधायक 2025 के विधानसभा चुनाव में कम अंतर से जीते थे, इसलिए उनकी अनुपस्थिति चुनाव परिणाम पर निर्णायक साबित हुई। RJD प्रत्याशी अमरेंद्र धारी सिंह को करारी हार का सामना करना पड़ा, जबकि NDA ने सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज की।




















