आम की कमी और भारी खर्च से कंपनी को हुआ नुकसान, अब नई रणनीति के साथ शुरू की तैयारी
लखनऊ : मलिहाबाद में मंडी परिषद द्वारा बनाया गया मैंगो पैक हाउस पिछले वर्ष आम के निर्यात के बाद से बंद पड़ा है। उस समय कंपनी को मांग के अनुसार निर्यात के लिए आम नहीं मिल सके और किसी तरह केवल 29 टन आम का निर्यात किया जा सका। इसके बाद हर माह करीब सात लाख रुपये किराया, बिजली और मशीनरी समेत लाखों रुपये के खर्च के कारण कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा। अन्य फल और सब्जियों का निर्यात भी नहीं हो सका। अब कंपनी ने एक बार फिर आम पर भरोसा जताते हुए निर्यात की तैयारी शुरू कर दी है।
पैक हाउस को जून 2025 में एक कंपनी ने टेंडर के जरिए नए सिरे से संचालित किया था। आम के निर्यात को बढ़ाने के लिए विभागीय स्तर पर कई बैठकें की गईं और कई देशों से ऑर्डर भी लिए गए। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद निर्यात के लिए पर्याप्त आम नहीं मिल सका। इसका कारण यह रहा कि बागवानों को बाहरी निर्यातकों ने अधिक कीमत दी और वे सीधे बागों से आम खरीदकर निर्यात कर ले गए। इस वजह से पैक हाउस केवल एक माह ही संचालित हो सका।
हर माह किराया और अन्य खर्च निकालने के लिए केला, हरी मिर्च और अन्य सब्जियों के निर्यात की भी कोशिश की गई, लेकिन इसमें भी सफलता नहीं मिली। कोलकाता से सब्जियां खरीदने की योजना बनी, मगर अधिक लागत के कारण यह प्रयास भी विफल हो गया। कंपनी के सीईओ अमित अग्रवाल ने बताया कि इस बार अधिक से अधिक आम का निर्यात करने की योजना है और इसके लिए बैठकों के जरिए तैयारी शुरू कर दी गई है। प्रदेश में लखनऊ, उन्नाव, हरदोई, प्रतापगढ़, वाराणसी और सहारनपुर समेत करीब 14 जिलों में बड़े पैमाने पर आम का उत्पादन होता है, लेकिन पैक हाउस के माध्यम से महज एक प्रतिशत आम ही निर्यात हो पाता है। जून 2025 में यहां से 29 टन आम जापान, मलेशिया, लंदन और बेल्जियम सहित कुछ देशों को भेजा गया था। इससे पहले पैक हाउस संचालित करने वाली कंपनी भी इन्हीं कारणों से निर्यात बढ़ाने में सफल नहीं हो सकी थी।
इस बार नई कंपनी ने कुछ देशों की मांग के अनुसार गामा रेडिएशन यूनिट भी लगाई है। इसे निर्यात इंटीग्रेटेड यूनिट से जोड़ा गया है, जहां मांग के अनुसार फल और सब्जियों की प्रोसेसिंग, पैकिंग और गामा रेडिएशन ट्रीटमेंट किया जाता है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण खासकर खाड़ी देशों में कृषि उत्पादों का निर्यात प्रभावित हुआ है। हवाई सेवाएं बंद होने से सब्जियां और अन्य उत्पाद डंप हो रहे हैं और कई जगह खराब भी हो रहे हैं। माल नहीं भेज पाने की वजह से निर्यातकों ने किसानों से खरीद भी बंद कर दी है, जिससे किसान स्थानीय बाजारों और अन्य राज्यों में ही अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं।
























