जामिया इस्लामिया खैराबाद पहुंचकर जुलूस का हुआ समापन
सुल्तानपुर, संवाददाता : रमजान-उल-मुबारक के आखिरी जुमे (जुमातुल विदा) की नमाज जिले भर की मस्जिदों में अकीदत और एहतराम के साथ अदा की गई। इस मौके पर शहर में हर वर्ष की तरह इस साल भी परंपरागत रूप से 77वां ‘मदहे सहाबा जुलूस’ निकाला गया। जुलूस में शामिल लोगों ने अमन, इंसानियत और कौमी एकता का संदेश दिया।
जुलूस चौक स्थित बीबिया मस्जिद से नातिया कलाम और नारे-ए-तकबीर की सदाओं के बीच शुरू हुआ। यह जुलूस शाहगंज चौराहा, डाकखाना चौराहा, गंदा नाला, चौक घंटाघर और चित्रा स्टूडियो होते हुए जामिया इस्लामिया खैराबाद पहुंचा, जहां इसका समापन हुआ।
आयोजकों के अनुसार, यह जुलूस फतह-ए-मक्का के अवसर पर पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम द्वारा दी गई आम माफी और इंसानियत के संदेश की याद में निकाला जाता है। जुलूस के माध्यम से आपसी भाईचारा, सौहार्द और गिले-शिकवे भुलाकर एकता बनाए रखने का पैगाम दिया गया। इस दौरान मौलाना मुहम्मद उसामा कासमी ने नातिया कलाम पेश कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जुलूस की अगुवाई मौलाना मुहम्मद कसीम कासमी और मौलाना मुहम्मद उस्मान कासमी ने संयुक्त रूप से की। कार्यक्रम में विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोगों ने भी भाग लिया, जो सुल्तानपुर की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल माना जाता है। इस अवसर पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला अध्यक्ष मौलाना सैय्यद मताहरुस्सलाम कासमी, निजाम खान, एडवोकेट राशिद खान, सभासद अहमद, रिजवान अहमद, मिर्जा उमेर, अलकमा नोमान और इलियास सहित कई लोग मौजूद रहे। इसके अलावा जरायम इंसिदाद कमेटी से अमर बहादुर, अबूजर खान, इकरमा खान, सादान और अनिल द्विवेदी समेत शहर की कई प्रमुख हस्तियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। पूरा जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।























