मांग बढ़ने से भट्टियों की कीमत डेढ़ गुना तक पहुंची, होटलों-रेस्टोरेंट में महंगी हुई थाली
लखनऊ, संवाददाता : रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत बढ़ने के साथ शहर में ढाबों और नाश्ते की दुकानों में भट्ठियां फिर से जलने लगी हैं। कई घरों और रेस्टोरेंट में इंडक्शन पर खाना पकाया जा रहा है। इसके चलते कोयला, लकड़ी और इंडक्शन चूल्हों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो गई है। घरेलू इंडक्शन की कीमत जहां 1500 से बढ़कर 4000 रुपये तक पहुंच गई है, वहीं कामर्शियल इंडक्शन 9000 से 12000 रुपये तक बिक रहा है।
लखनऊ व्यापार मंडल के वरिष्ठ महामंत्री पवन मनोचा ने बताया कि गैस की कमी के कारण इंडक्शन और भट्टियों की मांग तेजी से बढ़ी है। उन्होंने गैस किल्लत की समस्या दूर करने के लिए जिलाधिकारी से ठोस कदम उठाने की मांग की है। आलमबाग के मवैया क्षेत्र में ईंट, लोहे के ड्रम, जाली और मिट्टी से बनने वाली भट्टियों की मांग भी बढ़ गई है। भट्टी विक्रेता विपिन कुमार प्रजापति के अनुसार उन्हें करीब 600 भट्टियों के ऑर्डर मिल चुके हैं, जबकि प्रतिदिन केवल 70 भट्टियां ही तैयार हो पा रही हैं। बुकिंग के दो-तीन दिन बाद ही भट्टी उपलब्ध कराई जा रही है। मांग बढ़ने से भट्टियों की कीमत भी डेढ़ गुना तक बढ़ गई है। इस समय एक भट्टी 2500 रुपये में मिल रही है, जबकि अर्जेंट में व्यापारी 4000 रुपये तक देने को तैयार हैं।
वहीं होटलों और रेस्टोरेंट में भट्टियां जलने से कोयला और लकड़ी की मांग भी बढ़ गई है। कोयला मंडी के व्यापारी शुभम ने बताया कि कोयले का दाम 40 रुपये से बढ़कर 45 रुपये प्रति किलो हो गया है। तंदूर में इस्तेमाल होने वाली इमली की लकड़ी 45 रुपये किलो और बबूल की लकड़ी 40 रुपये किलो बिक रही है, जबकि जलावन लकड़ी 12 रुपये से बढ़कर 15 रुपये प्रति किलो हो गई है। चारबाग, नरही, बालू अड्डा, हजरतगंज, जियामऊ और चौक समेत कई क्षेत्रों के होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट में मिट्टी की भट्टियां इस्तेमाल की जा रही हैं। कोयला और लकड़ी महंगी होने से खाने-पीने की कीमतें भी बढ़ गई हैं। जहां पहले 50 रुपये की थाली मिलती थी, वह अब 70 रुपये, 60 रुपये वाली थाली 80 रुपये और 80 रुपये वाली थाली 100 रुपये में मिल रही है। रेस्टोरेंट में फास्ट फूड और अन्य व्यंजनों के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं।
























