50 वर्ष पूर्व मुंबई स्थित भगवद्गीता पाठशाला के स्वर्ण जयंती समारोह को पाडुरंगशास्त्री ( दादा जी ) जी ने “भावमिलन समारोह ” का नाम दिया था
लखनऊ, संवाददाताः पांडुरंगशास्त्री आठवले( दादा जी) प्रेरित स्वाध्याय परिवार ने गणतंत्र दिवस योगेश्वर-दिन के रूप में मनाया। माधवबाग मुंबई स्थित श्रीमद्भगवद्गीता पाठशाला शताब्दी वर्ष में इस वर्ष का योगेश्वर-दिन’ का उत्सव स्वाध्याय परिवार के लिए विशेष संस्मरण का दिन रहा। योगेश्वर मतलब ईश्वर भगवान श्री हरि विष्णु। राजधानी लखनऊ के कई स्थानों पर स्वाध्याय परिवार ने यह उत्सव मनाया। लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित भरतनगर क्षेत्र में यह उत्सव उत्साह के साथ मनाया गया।

जिसमें स्वाध्याय परिवर के बाल संस्कार केंद्र के बालक बालिकाओं द्वारा भगवद्गीता पाठशाला को भावनृत्य द्वारा स्मरण किया गया।
पाडुरंगशास्त्री आठवले भारतवर्ष एवं सम्पूर्ण विश्व में प्रख्यात हैं। उन्हें पद्मविभूषण, मैग्सेसे अवार्ड, टेम्पलटन एवं गांधी शांती पुरस्कार से सम्मानित व ऋषि प्रणीत वैदिक तत्वज्ञान से विभूषित किया जा चुका है। उन्होंने ही स्वाध्याय परिवार के लिए आज से ठीक 50 वर्ष पूर्व गणतंत्र दिवस को ‘योगेश्वर-डे’ के रूप में मनाने का संकल्प लिया था। स्वाध्याय परिवार ने उनके सपनों को साकार कर दिखाया।

आज से ठीक 50 वर्ष पूर्व मुंबई स्थित भगवद्गीता पाठशाला के स्वर्ण जयंती समारोह को पाडुरंगशास्त्री ( दादा जी ) जी ने “भावमिलन समारोह ” का नाम दिया था। इस मिलन की विशेषता “भगवान के उदारभाव और मानव के कृतज्ञभाव को दर्शाता है, मिलन कराता है। भगवद्गीता पाठशाला से दादा जी ने मानव के भीतर निर्माण की गई तेजस्विता, ईश्वरनिष्ठा और कृतज्ञता के 50 वर्ष का मिलन कराया। भारत वर्ष के 17 राज्यों से अधिक एवं विश्व के 38 देशों में स्वाध्याय-परिवार ‘योगेश्वर-दिन’ का यह उत्सव हर वर्ष 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन मनाता है।
























