वादी कवि अभय सिंह ‘निर्भीक’ ने गिरफ्तारी की मांग तेज की, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर फिर छिड़ी बहस
लखनऊ, संवाददाता : लोक गायिका और कवयित्री नेहा सिंह राठौर के खिलाफ दर्ज देशद्रोह के मुकदमे ने एक बार फिर राजनीतिक, साहित्यिक और सामाजिक बहस को तेज कर दिया है। शनिवार देर रात नेहा सिंह राठौर द्वारा लखनऊ के हजरतगंज थाने पहुंचकर बयान दर्ज कराने के बाद इस मामले के वादी, कवि अभय सिंह ‘निर्भीक’ ने तीखा बयान जारी करते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। यह मामला अब केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राष्ट्रवाद, देशप्रेम और सोशल मीडिया की सीमाओं पर एक बड़े वैचारिक विमर्श का रूप ले चुका है।
27 अप्रैल 2025 को दर्ज हुआ था मुकदमा
कवि अभय सिंह ‘निर्भीक’ के अनुसार, उन्होंने 27 अप्रैल 2025को लखनऊ के थाना हजरतगंज में नेहा सिंह राठौर के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि पहलगाम आतंकी हमले के दौरान सोशल मीडिया पर की गई उनकी टिप्पणियां आपत्तिजनक थीं और इससे देश की एकता, अखंडता व राष्ट्रीय भावनाओं को ठेस पहुंची।वादी पक्ष का कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का नहीं, बल्कि राष्ट्र-विरोधी सोच का प्रतीक है, जिस पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत का दावा
अभय सिंह ‘निर्भीक’ का दावा है कि नेहा सिंह राठौर ने इस मामले में पहले उच्च न्यायालयऔर फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन दोनों ही जगहों से उन्हें राहत नहीं मिली। उन्होंने कहा कि “जिस व्यक्ति को माननीय हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिली हो, उसकी गिरफ्तारी स्वाभाविक प्रक्रिया है।” हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक आदेश सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है, लेकिन वादी पक्ष लगातार मामले की गंभीरता पर जोर दे रहा है।
देर रात थाने पहुंचीं नेहा सिंह राठौर
शनिवार देर रात नेहा सिंह राठौर अपने पति के साथ हजरतगंज थाने पहुंचीं, जहां उन्होंने देशद्रोह के मामले में अपना बयान दर्ज कराया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक यह प्रक्रिया नोटिस के तहत पूरी की गई। देर रात होने के कारण विस्तृत पूछताछ नहीं हो सकी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल गिरफ्तारी नहीं हुई है और जांच जारी है। आगे की पूछताछ के लिए उन्हें फिर बुलाया जा सकता है।
वादी कवि का तीखा बयान
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अभय सिंह ‘निर्भीक’ ने कहा कि वह इस समय जबलपुर में कवि सम्मेलन के सिलसिले में हैं, लेकिन पूरे मामले पर उनकी नजर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण मामला नहीं है और कानून को अपना काम करना चाहिए। साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों और शुभचिंतकों का आभार भी जताया।
कविता के जरिए जताया आक्रोश
अभय सिंह ‘निर्भीक’ ने अपने बयान के साथ एक कविता के माध्यम से भी अपनी भावनाएं व्यक्त कीं—>
कुछ देशप्रेम के मंत्र वहां जाकर हमने बाँचे तो हैं।
इस देशद्रोह के विषधर के फन पर चढ़कर नाचे तो हैं।
इस देशद्रोह के अंधड़ को आगे बढ़ ललकारा तो है।
धीमा ही सही तमाचा पर हमने जाकर मारा तो है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम देशद्रोह
यह मामला एक बार फिर उस बहस को केंद्र में ले आया है, जिसमें सवाल उठता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा कहां समाप्त होती है और कब कोई बयान देशद्रोह की श्रेणी में आ जाता है। एक ओर नेहा सिंह राठौर के समर्थक इसे एक कलाकार की सामाजिक-राजनीतिक राय बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वादी पक्ष का कहना है कि आतंकी घटनाओं जैसे संवेदनशील मुद्दों पर की गई टिप्पणियां यदि राष्ट्र की भावना को कमजोर करती हैं, तो उन्हें महज़ राय कहकर टाला नहीं जा सकता।
























