महाकाल दर्शन से मिली शांति और सकारात्मक ऊर्जा: नुसरत
उज्जैन, संवाददाता : बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री नुसरत भरूचा ने हाल ही में मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दर्शन किए। पुत्रदा एकादशी के पावन अवसर पर उन्होंने बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और तड़के आयोजित विशेष भस्म आरती में भाग लिया। यह नुसरत की महाकाल मंदिर की दूसरी यात्रा बताई जा रही है, जहां वे पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव में नजर आईं।

भस्म आरती के दौरान नुसरत नंदी हॉल में बैठकर शिव भक्ति में लीन दिखीं। आरती के पश्चात मंदिर के पुजारियों ने उन्हें विशेष प्रसाद स्वरूप महाकाल चिन्हित दुपट्टा भेंट किया, जिसे प्राप्त कर अभिनेत्री भावुक नजर आईं। दर्शन के बाद उन्होंने मंदिर प्रबंधन और व्यवस्था की खुलकर प्रशंसा की।
मंदिर व्यवस्था पर जताई संतुष्टि
नुसरत भरूचा ने कहा कि भारी भीड़ के बावजूद दर्शन व्यवस्था बेहद सुव्यवस्थित और सुगम रही। उन्होंने विशेष रूप से जल अर्पण की पाइप व्यवस्था की सराहना की, जिसके माध्यम से श्रद्धालु बिना लंबी कतार में लगे सीधे ज्योतिर्लिंग पर जल चढ़ा सकते हैं। अभिनेत्री के अनुसार महाकाल के दर्शन से उन्हें गहरी शांति, सकारात्मक ऊर्जा और नई शक्ति की अनुभूति होती है। उन्होंने भविष्य में भी नियमित रूप से महाकाल दर्शन की इच्छा जताई।
मौलाना रजवी का कड़ा बयान
इधर, ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस विषय पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि किसी भी गैर-इस्लामी धार्मिक स्थल पर जाकर पूजा-अर्चना, जल चढ़ाना या भक्ति करना इस्लाम में नाजायज और हराम है।

इस्लामी शिक्षाओं का उल्लंघन बताया
मौलाना रजवी ने स्पष्ट किया कि इस्लाम केवल अल्लाह की इबादत की अनुमति देता है और अन्य धर्मों के पूजा स्थलों में धार्मिक क्रियाओं में शामिल होना शरीयत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि यदि कोई मुस्लिम ऐसा करता है, तो उसे तुरंत तौबा करनी चाहिए, अल्लाह से दिल से माफी मांगनी चाहिए और कलमा पढ़कर अपने कृत्य पर पश्चाताप करना चाहिए।
समुदाय से की अपील
मौलाना ने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि वे अपनी धार्मिक सीमाओं का सम्मान करें और शरीयत के नियमों का पालन करें। उनका कहना है कि धार्मिक पहचान और आस्थाओं के पालन में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। नुसरत भरूचा की यह यात्रा जहां उनके आध्यात्मिक झुकाव और धार्मिक स्थलों के प्रति आस्था को दर्शाती है, वहीं मौलाना के बयान के बाद यह मामला धार्मिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है।






















