सुदामा प्रसंग और रुक्मिणी विवाह की भावपूर्ण व्याख्या, गुरु कृपा से मुक्ति का संदेश

अमेठी,संवाददाता : दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सप्तम दिवस पर भक्तिभाव, ज्ञान और वैराग्य का अनुपम संगम देखने को मिला। यह भव्य आयोजन DJJS (आश्रम), पूरे गणेश लाल, ग्राम भरेथा, हथकिला चौराहा, दुर्गापुर रोड, अमेठी में 07 जनवरी से 13 जनवरी 2026 तक संपन्न हो रहा है। कथा के दौरान भागवताचार्या महामनस्विनी विदुषी साध्वी सुश्री पद्महस्ता भारती जी ने सुदामा प्रसंग एवं रुक्मिणी विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने रुक्मिणी को जीवात्मा का प्रतीक बताते हुए कहा कि जब आत्मा अपने प्रभु प्रियतम के प्रति विरह भाव से पुकार करती है, तब परमात्मा उसे समस्त सांसारिक बंधनों से मुक्त कर अपने शाश्वत प्रेम सूत्र में बांध लेते हैं।

गुरु कृपा से ही होती है मुक्ति की प्राप्ति
कथा का सार प्रस्तुत करते हुए साध्वी जी ने राजा परीक्षित के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित भय और असुरक्षा से घिरे होने के बावजूद केवल हरि कथा सुनने मात्र से मुक्त नहीं हुए, बल्कि पूर्ण गुरु श्री शुकदेव जी महाराज द्वारा ब्रह्म तत्त्व का साक्षात्कार कराने पर ही उन्हें मुक्ति प्राप्त हुई।
शास्त्र वचन “भिद्यते हृदय ग्रंथिश्छिद्यन्ते सर्व संशयाः” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अज्ञान और संशय का नाश केवल गुरु द्वारा प्रदत्त दिव्य नेत्र से ही संभव है।
भगवद्गीता का संदर्भ देते हुए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन से कहे गए वचन—
“दिव्यं ददामि ते चक्षु पश्य मे योगमैश्वरम्”
को उद्धृत किया और बताया कि दिव्य दृष्टि प्राप्त होते ही मनुष्य की समस्त दुर्बलताएँ उसी प्रकार नष्ट हो जाती हैं जैसे सूर्य उदय होते ही कुहासा समाप्त हो जाता है।

ब्रह्मज्ञान से विश्व शांति की ओर अग्रसर संस्थान
साध्वी जी ने बताया कि आज दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान में परम पूज्य सर्वश्री आशुतोष महाराज जी से ब्रह्मज्ञान प्राप्त कर असंख्य साधकों ने राजा परीक्षित की भांति मुक्ति का मार्ग पाया है। संस्थान इसी ब्रह्मज्ञान के माध्यम से विश्व शांति, बंधुत्व और एकता की स्थापना की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। कथा के समापन पर साध्वी पद्महस्ता भारती जी ने भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह में भारी संख्या में सहभागिता के लिए क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग संस्थान के लिए चिरस्मरणीय रहेगा। उन्होंने सभी को ब्रह्मज्ञान प्राप्ति हेतु आमंत्रित करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार सहयोग की अपेक्षा जताई।
भजनों पर झूमे श्रद्धालु

कथा की मार्मिकता और रोचक प्रस्तुति से प्रभावित होकर अपार जनसमूह के साथ-साथ शहर के विशिष्ट नागरिक भी कथा श्रवण हेतु पहुंचे। मधुर संगीत से सुसज्जित भजन-कीर्तन ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूमने को विवश हो गए।























