दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी के सान्निध्य में मिला भागवत कथा का आध्यात्मिक सार
अमेठी,संवाददाता : जनपद अमेठी के ग्राम भरेथा, हथकिला चौराहा के निकट, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्त्वावधान में एवं दिव्य गुरु सर्वश्री आशुतोष महाराज जी की कृपा से आयोजित सप्तदिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ (7 से 13 जनवरी 2026) के तृतीय दिवस में श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही।

कथा के तृतीय दिवस पर दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी की शिष्या, कथा व्यास भागवत भास्कर साध्वी सुश्री पद्म हस्ता भारती जी ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब-जब धरती पर पाप बढ़ता है और धर्म की हानि होती है, तब-तब भक्तों के कल्याण एवं धर्म की स्थापना हेतु परमात्मा अवतार लेते हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा इस धरा पर सदैव किसी न किसी रूप में विद्यमान रहते हैं, किंतु उन्हें पहचानने के लिए दिव्य दृष्टि की आवश्यकता होती है।

साध्वी जी ने गोस्वामी तुलसीदास महाराज के दोहों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि बिना दिव्य दृष्टि के ईश्वर का साक्षात्कार संभव नहीं। उन्होंने बताया कि संसार को देखने के लिए चर्म चक्षु पर्याप्त हैं, लेकिन ईश्वर को जानने और पहचानने के लिए ज्ञान चक्षु अनिवार्य है।
इस अवसर पर दिव्य गुरु आशुतोष महाराज जी के वचनों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि जब तक साधक की दिव्य दृष्टि नहीं खुलती, तब तक न तो ईश्वर का दर्शन संभव है और न ही उनकी वास्तविक पहचान।

कथा में स्वामी विश्वनाथानन्द जी, स्वामी शिवशरणानन्द जी एवं साध्वी राधा माता जी विशेष रूप से विराजमान रहे। कार्यक्रम में अनेक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से महारानी गरिमा सिंह (सपरिवार), भूपति भवन अमेठी, कमलाकांत मिश्रा (जिला उपाध्यक्ष, विहिप अमेठी), विवेक के.के. मिश्रा (राज्य निदेशक, प्रकृति कल्याण परिषद, उ.प्र.), राजमणि मिश्रा, रज्जू उपाध्याय (ग्राम प्रधान, कालिकन), बलवंत सिंह, श्याम नारायण ओझा (वरिष्ठ समाजसेवी), राम ताड़क शुक्ला एवं अखंड प्रताप सिंह (समाजसेवी) शामिल रहे। कथा स्थल पर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने दिव्य ज्ञान रसपान कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
























