श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ – पंचम दिवस

अमेठी,संवाददाता : दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में आश्रम, पूरे गणेश लाल, ग्राम-भरेथा, हथकला चौराहा, प्रयागराज रोड, अमेठी में 07 जनवरी से 13 जनवरी 2026 तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस पर श्रीआशुतोष महाराज जी की शिष्या, भागवताचार्या महामनस्विनी साध्वी सुहस्ता भारती जी ने गोवर्धन पूजा प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया।

साध्वी जी ने कहा कि श्रीकृष्ण केवल ग्वाल-बालों के सखा ही नहीं थे, बल्कि वे मानव चेतना के जाग्रतकर्ता भी थे। उन्होंने आत्म-जागरण के माध्यम से संगठन और सामूहिक चेतना का अद्भुत पाठ पढ़ाया।
इस अवसर पर उन्होंने अंतरिक्ष यात्री यूरी गैगरीन का उदाहरण देते हुए बताया कि जब वे अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखकर लौटे, तो उनके मन में केवल एक ही भाव था — “My Earth – मेरी पृथ्वी”। यह उदाहरण दर्शाता है कि जैसे-जैसे चेतना ऊँची होती है, वैसे-वैसे संकीर्ण सीमाएँ टूटती जाती हैं और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का भाव जाग्रत होता है।
गोवर्धन पूजा प्रसंग के माध्यम से साध्वी जी ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम ‘संरक्षण’ की चर्चा की। उन्होंने बताया कि विकास की अंधी दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से पृथ्वी विनाश के कगार पर खड़ी है। इसी असंतुलन को दूर करने हेतु संस्थान द्वारा स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, जल एवं ऊर्जा संरक्षण, झील व नदी सफाई तथा तुलसी रोपण जैसे कार्य निरंतर किए जा रहे हैं।

साध्वी जी ने आगे देशी ‘गौ संरक्षण एवं संवर्धन कार्यक्रम – कामधेनु’ पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गौ माता भारतीय संस्कृति का आधार हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है —
“धेनूनामस्मि कामधेनुः”
अर्थात मैं गायों में कामधेनु हूँ।

आज देशी गौ नस्लों के लुप्त होने पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण समय की परम आवश्यकता है। श्रीआशुतोष महाराज जी के मार्गदर्शन में संस्थान द्वारा चलाए जा रहे कामधेनु प्रकल्प के अंतर्गत जन-जन को देशी गायों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कथा के अंत में साध्वी सुहस्ता भारती जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं से गौ माता के संरक्षण और प्रकृति के पूजन का संकल्प लेने का आह्वान किया।
























