कठघरे में कॉलेज प्रशासन, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर उठे सवाल
अयोध्या, संवाददाता : राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में पहले बिना बिल वाउचर के पहुंची दवाएं और अब लाखों के वाटरलेस शैंपू और बॉडी वॉश के डंप किए जाने का मामला सामने आने के बाद से हड़कंप मच गया है। खरीदे गए शैंपू और बॉडी वॉश का उपयोग नहीं होने से मेडिकल कॉलेज प्रशासन भी कटघरे में आ गया है।
सूत्रों के मुताबिक बेड सोर से पीड़ित मरीजों को साफ-सुथरा रखने और संक्रमण से बचाने के उद्देश्य से वाटरलेस शैंपू और बॉडीवॉश मंगाए गए थे। अलग-अलग मरीजों पर इनके उपयोग के जरिए यह अध्ययन भी किया जाना था कि कौन-सा उत्पाद अधिक उपयुक्त है। खरीदारी तत्कालीन प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा के समय हुई थी। इसके बाद इसका उपयोग भी किया गया। कई बार इंडेंट कराए जाने की बातें भी सामने आई हैं। मेडिकल और सर्जरी विभाग में इनका उपयोग किया गया, लेकिन कुछ दिन के बाद इस पर एक दम से विराम लगा दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, आईसीयू में इसका उपयोग ही नहीं किया गया।
बताया जाता है कि आईसीयू में वेंटिलेटर पर कई कई दिन तक मरीज भर्ती रहते हैं। इस शैंपू और बॉडीवॉश का उपयोग करते समय पानी का उपयोग कम और या फिर नहीं किया जाता। इसके मरीजों में इंफेक्शन का खतरा कम हो जाता है। इसके बावजूद इसका उपयोग नहीं किया गया। इसे डंप रहने दिया गया। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दिनेश सिंह मार्तोलिया ने बताया कि गोदाम में शैंपू और बॉडी वॉश रखे होने की जानकारी मिली है। इतनी बड़ी मात्रा में खरीद क्यों की गई, इसकी जांच कराई जाएगी। यह पूर्व प्राचार्य ने मंगाया था। मेडिकल कॉलेज में इतने महंगे उत्पादों की जरूरत नहीं थी। अभी लखनऊ में हूं। वापस पहुंचकर पूछताछ कराई जाएगी।






















