सेमिनार में डॉक्टरों के बीच हुआ नई तकनीकों और उपचार पर मंथन
लखनऊ, संवाददाता : डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित एक सेमिनार में विशेषज्ञों ने ऑटोइम्यून बीमारियों को लेकर गंभीर चेतावनी दी। पैथोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. नुजहत हुसैन ने कहा कि त्वचा पर दाग-धब्बे, बालों का झड़ना और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये ल्यूपस जैसी गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि ल्यूपस त्वचा के साथ-साथ लिवर, किडनी और दिल को भी प्रभावित कर सकता है। यह बीमारी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक पाई जाती है और कम उम्र में ही उन्हें अपनी चपेट में ले सकती है। समय पर पहचान और नियमित जांच से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। डॉ. हुसैन ने यह भी बताया कि हाइपोथायरॉइडिज्म के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे कमजोरी और बाल झड़ने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। सही समय पर पहचान और डॉक्टर की सलाह से स्टेरॉयड दवाओं के जरिए इसे नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऑटोइम्यून विकार तब होते हैं जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता खुद ही शरीर की कोशिकाओं पर हमला करने लगती है, जिससे सूजन, अंगों को नुकसान और कई जटिल समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
डॉ. सिद्धार्थ दत्ता गुप्ता ने ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस और सामान्य हेपेटाइटिस के बीच अंतर समझाया। उन्होंने बताया कि समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर होकर लिवर फेल तक पहुंच सकती है, जिससे ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने कहा कि ऐसे सेमिनार डॉक्टरों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान का बेहतर माध्यम हैं, जिससे नई तकनीकों की जानकारी मिलती है और मरीजों को बेहतर इलाज मिल पाता है। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह, डीन डॉ. प्रदुमन सिंह समेत कई वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे।























