वीर नायकों के जीवन पर नाटक मंचन की बताई जरूरत
लखनऊ, संवाददाता : योगी आदित्यनाथ ने रविवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी के नए भवन और दो प्रेक्षागृहों के लोकार्पण समारोह में इतिहास, संस्कृति और रंगमंच की भूमिका पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सालार मसूद “किसी माफिया से कम नहीं था” और वर्तमान में जिन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, उनकी विचारधारा भी उसी से जुड़ी बताई। उन्होंने आरोप लगाया कि सालार मसूद ने मंदिरों को तोड़ा था, जबकि महाराजा सुहेलदेव ने उसे परास्त कर जनता को दासता से मुक्त कराया।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि वीर नायकों के जीवन पर आधारित नाटकों का निर्माण और मंचन स्कूलों व कॉलेजों में किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उनके इतिहास और योगदान से परिचित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस स्थान पर सालार मसूद मारा गया था, वहां उसके नाम से मेला लगता था, जबकि महाराजा सुहेलदेव को लंबे समय तक भुला दिया गया। उनके अनुसार, करीब एक हजार साल बाद नरेंद्र मोदी के प्रयासों से उन्हें सम्मान मिला और अब वहां उनके नाम पर बड़े आयोजन हो रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारतीय रंगमंच और सिनेमा की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज सांस्कृतिक प्रस्तुतियां समाज को दिशा देने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के नाटकों का उल्लेख करते हुए ऐतिहासिक विषयों पर आधारित नाटकों को शिक्षा संस्थानों में बढ़ावा देने की बात कही। योगी आदित्यनाथ ने रानी लक्ष्मीबाई और महाराजा सुहेलदेव जैसे वीरों के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। इसके अलावा, उन्होंने कोरोना काल का जिक्र करते हुए कहा कि लॉकडाउन के दौरान सरकार ने प्रवासी कामगारों को घर पहुंचाने और मुफ्त राशन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब शासन संवेदनशील नहीं होता, तब समाज में वैसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, जैसा कि ‘आनंद मठ’ की प्रस्तुति में देखने को मिलता है।
























