गैस की कमी के बीच श्रद्धालुओं ने संभाली व्यवस्था, हजारों भक्तों को मिल रहा प्रसाद

लखनऊ, संवाददाता : चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर मां चंद्रिका देवी मंदिर में इस बार भंडारे की व्यवस्था एक अलग ही रूप में देखने को मिल रही है। गैस की कमी के बीच यहां लकड़ी के पारंपरिक चूल्हों पर भंडारा तैयार किया जा रहा है, जो सेवा और परंपरा का अनूठा संगम प्रस्तुत कर रहा है। मंदिर परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। ऐसे में भंडारे की व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों ने मिलकर जिम्मेदारी संभाल रखी है। गैस सिलेंडर की सीमित उपलब्धता के कारण भोजन बनाने के लिए पुराने तरीके यानी लकड़ी के चूल्हों का सहारा लिया जा रहा है।

भंडारे में खिचड़ी, पूड़ी-सब्जी और अन्य प्रसाद तैयार किया जा रहा है, जिसे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को वितरित किया जा रहा है। चूल्हों से उठता धुआं और उसमें बनता प्रसाद न केवल पारंपरिक स्वाद को जीवित रख रहा है, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक भी बन गया है। सेवा में जुटे लोगों का कहना है कि चाहे जैसी भी परिस्थितियां हों, मां की सेवा और श्रद्धालुओं के लिए भंडारा कभी रुक नहीं सकता। गैस की कमी ने भले ही चुनौती पैदा की हो, लेकिन इसने लोगों को अपनी परंपराओं की ओर लौटने का अवसर भी दिया है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, नवरात्र के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंच रहे हैं और भंडारे का प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं। व्यवस्था को बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। कुल मिलाकर, मां चंद्रिका देवी मंदिर में इस बार का नवरात्र उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी सेवा, समर्पण और परंपरा का भाव किस तरह जीवित रखा जा सकता है।
























