माघ मेले में करीब 85 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, अक्षय वट दर्शन से मिली शांति की अनुभूति

प्रयागराज,संवाददाता : मकर संक्रांति पर तीर्थराज प्रयाग के संगम तट पर आस्था, श्रद्धा और सनातन संस्कृति का अद्वितीय दृश्य देखने को मिला। प्रातः काल से ही श्रद्धालुओं का विशाल जनसैलाब संगम की ओर उमड़ पड़ा और दिन भर में लगभग 85 लाख श्रद्धालुओं ने पावन त्रिवेणी में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
तीर्थराज प्रयाग स्थित अक्षय वट के निरंतर दर्शन को श्रद्धालु उमड़ पड़े। सनातन धर्म की ध्वजा को अपने भीतर समेटे अक्षय वट, युगों-युगों से अमरत्व और शाश्वतता का जीवंत प्रतीक बना हुआ है। तीर्थराज के द्वार पर स्थित यह दिव्य वटवृक्ष स्वयं एक तीर्थ के रूप में श्रद्धालुओं और जिज्ञासुओं को समान रूप से आकर्षित कर रहा है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को आज भी अक्षय वट के माध्यम से अमरत्व के अस्तित्व का आशीर्वाद मिल रहा है।

राम वन गमन पथ से संगम में अमृत स्नान कर लौट रहे अमेठी के पंकज तिवारी, सुल्तानपुर के अजय दुबे, पखरौली निवासी राजिंदर व मल्लर सिंह औद्योगिक क्षेत्र त्रिसुंडी के एक ढाबे पर मिले। उन्होंने बताया कि संगम स्नान के उपरांत बड़ी संख्या में श्रद्धालु अक्षय वट, पातालपुरी और सरस्वती कूप के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं। अयोध्या के जागेश्वर यादव परिवार के साथ मालवाहक वाहन से राम वन गमन पथ पर रुके थे। बातचीत के दौरान उनकी आंखें नम हो गईं। बोले—“भैया, आज धन्य हो गए। दो दिन के अथक परिश्रम में प्रयागराज के सभी तीर्थों के दर्शन हो गए।”

हाईवे पर रामगंज कस्बे में अयोध्या से आ रहे गेरुआ वस्त्रधारी एक बाबा ने कहा—
“गंगे मम हृदये तव भक्ति, गंगे तव दर्शनात मुक्ति।”

उन्होंने बताया कि गंगा हमारे हृदय में बसती हैं, केवल स्नान ही नहीं, दर्शन मात्र से भी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। राजस्थान से आए 45 वर्षीय नैनाराम ने बताया कि संगम स्नान के बाद वह अयोध्या में प्रभु श्रीराम के दर्शन के लिए जा रहे हैं। उन्होंने भावुक होकर कहा कि संतान प्राप्ति की कामना से पत्नी के नाम की डुबकी लगाई है और संकल्प लिया है कि संतान होने पर पुनः संगम स्नान करेंगे। संगम तट और हाईवे पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ यह दर्शा रही थी कि हर व्यक्ति इस पल को जीवन की अमिट स्मृति बनाने के संकल्प के साथ तीर्थराज प्रयाग पहुंचा है।
























