पहली बार पांच स्नान पर्वों पर चतुर्ग्रहीय योग, कुंभ समान पुण्य फल का विधान
प्रयागराज,संवाददाता : तीर्थराज प्रयाग के त्रिवेणी संगम तट पर माघ मास के पावन अवसर पर श्रद्धा और आस्था का महासंगम साकार हो उठा है। संगम तट पर तंबुओं की भव्य नगरी बस चुकी है, जहां संतों, महात्माओं और श्रद्धालुओं की चहल-पहल दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति और मोक्ष की कामना लेकर श्रद्धालु संगम के पवित्र जल में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। इस बार लगभग 15 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम स्नान करने का अनुमान है, जिसके अनुरूप प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं।

तीर्थराज प्रयाग में अखंड तप कल्पवास का शुभारंभ 3 जनवरी 2026 से हो चुका है। इस वर्ष माघ मेले में कुंभ के समान दुर्लभ और अलौकिक ज्योतिषीय संयोग बन रहा है। पहली बार माघ मेला के पांच प्रमुख स्नान पर्वों— पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, बसंत पंचमी, माघी पूर्णिमा और महाशिवरात्रि — पर एक ही राशि में चार-चार ग्रहों के संचरण से चतुर्ग्रहीय योग बन रहा है। इस विशेष संयोग से ‘सुधामृत योग’ का निर्माण हो रहा है, जो स्नानार्थियों को कुंभ के समान पुण्य फल प्रदान करेगा।
माघ मास में संगम की रेती पर लाखों संत और गृहस्थजन सांसारिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर तप, साधना और भक्ति में लीन हैं। सनातन धर्माचार्यों के अनुसार 2 जनवरी की संध्या 6:12 बजे पौष पूर्णिमा तिथि के आरंभ के साथ ही 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा स्नान पर्व से माघ मेला एवं कल्पवास का शुभारंभ हुआ।

सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या 18 जनवरी को पड़ेगा। इस दिन मकर राशि में मंगल, बुध, शुक्र और सूर्य का संचरण होगा। इसी प्रकार 23 जनवरी (बसंत पंचमी) तथा 1 फरवरी (माघी पूर्णिमा) को भी मकर राशि में चार ग्रहों का दुर्लभ संयोग बनेगा। अंतिम स्नान पर्व महाशिवरात्रि 15 फरवरी को होगा, जिसमें कुंभ राशि में सूर्य, बुध, शुक्र और राहु का संचरण रहेगा। माघ मेला के पांचों स्नान पर्वों पर एक राशि में चार ग्रहों का एक साथ होना अत्यंत दुर्लभ और अलौकिक माना जा रहा है।

धर्माचार्यों के अनुसार, जैसे कुंभ मेले में अमृत योग से श्रद्धालुओं को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है, वैसे ही इस बार माघ मेले में सुधामृत योग के कारण संगम स्नान का फल कई गुना बढ़ जाएगा।
आचार्य पंडित जय गोविंद तिवारी के अनुसार,

कैलेंडर में मकर संक्रांति 14 जनवरी को दर्शाई गई है, किंतु उसका पुण्यकाल 15 जनवरी को प्राप्त होगा। 14 जनवरी की रात 9:39 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे और दक्षिणायण से उत्तरायण की यात्रा प्रारंभ होगी। इसी के साथ देवताओं का दिन और दैत्यों की रात आरंभ मानी जाती है। इस अवसर पर मकर राशि में सूर्य और शुक्र का संचरण रहेगा तथा ब्रह्म योग का भी संयोग बनेगा। इसके अतिरिक्त 1 फरवरी की सायं 6:05 बजे शुक्रोदय होगा, जिसके बाद समस्त शुभ कार्यों का आरंभ शुभ माना जाएगा।
प्रमुख स्नान पर्व एवं तिथियां
- 2 जनवरी – पौष पूर्णिमा स्नान पर्व (माघ मेला एवं कल्पवास का शुभारंभ)
- 14–15 जनवरी – मकर संक्रांति स्नान पर्व (पुण्यकाल 15 जनवरी)
- 18 जनवरी – मौनी अमावस्या स्नान पर्व
- 23 जनवरी – बसंत पंचमी स्नान पर्व
- 1 फरवरी – माघी पूर्णिमा स्नान पर्व (कल्पवास का समापन)
- 15 फरवरी – महाशिवरात्रि स्नान पर्व (माघ मेला का समापन)
माघ मास में बने इस दुर्लभ सुधामृत योग के कारण तीर्थराज प्रयाग एक बार फिर आध्यात्मिक चेतना और पुण्य की अनुभूति का केंद्र बन गया है।
























