टॉर्चर चैंबर ने कैसे अपराध और सियासत के गठजोड़ ने दशकों तक राज्य को प्रभावित किया
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अपराध और राजनीति के गठजोड़ को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। राज्य के पूर्व डीजीपी और वर्तमान राज्यसभा सांसद बृजलाल ने माफिया अतीक अहमद के आपराधिक साम्राज्य को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उनके अनुसार, अतीक अहमद केवल एक अपराधी नहीं बल्कि क्रूरता का प्रतीक था, जिसे वर्षों तक राजनीतिक संरक्षण प्राप्त रहा।
टॉर्चर चैंबर और क्रूरता की हदें
बृजलाल के मुताबिक, अतीक अहमद ने अपने विरोधियों को प्रताड़ित करने के लिए एक विशेष टॉर्चर चैंबर बना रखा था। यहां वह लोगों को चाबुक से बेरहमी से पीटता था और जब वे अधमरे हो जाते, तब उन्हें गोली मार दी जाती। उस दौर में माफिया का खौफ इतना था कि लोग कुछ भी बोलने से डरते थे और पुलिस भी कई बार बेबस नजर आती थी।
अपराध की दुनिया में शुरुआत
अतीक अहमद का अपराध सफर 1979 में शुरू हुआ, जब उसने 17 साल की उम्र में पहला कत्ल किया। इसके बाद 1983 में दूसरा हत्या कांड और फिर रंगदारी व ठेकेदारी का धंधा शुरू हुआ। 1989 में उसने अपने ही गुरु चांद बाबा की हत्या कर दी, जिससे प्रयागराज में उसका दबदबा स्थापित हो गया।
राजनीतिक संरक्षण और बढ़ता प्रभाव
बृजलाल का आरोप है कि बिना राजनीतिक संरक्षण के कोई भी अपराधी इतना बड़ा नहीं बन सकता। 1996 में एक प्रमुख राजनीतिक दल से जुड़ने के बाद अतीक का प्रभाव तेजी से बढ़ा। उस समय अतीक, मुख्तार अंसारी और शहाबुद्दीन जैसे माफियाओं का गठजोड़ बना, जिनके पास आधुनिक हथियार थे और प्रशासनिक तंत्र पर उनका दबाव था।
राजू पाल हत्याकांड: सत्ता और साजिश
राजू पाल की हत्या को बृजलाल ने सत्ता और अपराध के गठजोड़ का उदाहरण बताया। खुफिया एजेंसियों ने पहले ही खतरे की चेतावनी दी थी, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। अंततः दिनदहाड़े हत्या ने पूरे प्रदेश को हिला दिया।
डीएम दफ्तर में बैठकर साजिश
एक अन्य घटना में, अतीक ने अपने विरोधी की हत्या की योजना इस तरह बनाई कि वह खुद डीएम कार्यालय में मौजूद रहा, ताकि उस पर शक न जाए। वहीं उसके गुर्गों ने कचहरी में हत्या को अंजाम दिया। यह घटना उस दौर में माफिया के आत्मविश्वास और सिस्टम पर पकड़ को दर्शाती है।
माफिया राज पर कार्रवाई और बदलाव
बृजलाल का कहना है कि हाल के वर्षों में राज्य में माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। बड़े अपराधियों के खिलाफ कदम उठाए गए हैं, जिससे कानून व्यवस्था में सुधार देखने को मिला है। उनका दावा है कि अब राज्य में अपराधियों के खिलाफ सख्ती बढ़ी है और आम जनता को राहत मिली है।























